वर्षों से सड़क निर्माण की मांग अधर में, ग्रामीण बोले—आश्वासन नहीं, अब धरातल पर चाहिए विकास
अमृतपुर
सरकार और प्रशासन की ओर से गांव-गांव विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ग्राम बड़ागांव के मौजा चपरा की बदहाल सड़क इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीण आज भी कीचड़, जलभराव और उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह पानी भर जाने और कीचड़ फैलने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। बच्चों को स्कूल जाने, महिलाओं को जरूरी कार्यों के लिए निकलने और बुजुर्गों को आवाजाही में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार राहगीरों के फिसलकर गिरने का खतरा भी बना रहता है।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर लंबे समय से संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जब गांवों के विकास के लिए योजनाएं और बजट जारी होते हैं, तो उनके गांव की मूलभूत सड़क सुविधा आखिर कब सुधरेगी।लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो वे आगामी चुनाव में अपनी नाराजगी का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करा सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनता को केवल आश्वासन देकर विकास का दावा नहीं किया जा सकता। उन्हें धरातल पर सड़क, जलनिकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं चाहिए।ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप कर सड़क निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह सड़क केवल आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि गांव के बच्चों की शिक्षा, मरीजों की सुविधा और ग्रामीणों के सम्मान से जुड़ा सवाल है।अब ग्रामीणों की निगाहें जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। देखना होगा कि उनकी वर्षों पुरानी मांग कब पूरी होती है और बड़ागांव-चपरा के लोगों को कीचड़ भरी राह से कब निजात मिलती है।


