काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के बीच भारत लगातार राहत और बचाव अभियान में मदद कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बुधवार को संसद में भारत और चीन का आभार जताते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी देशों ने संकट की घड़ी में समय पर राहत सामग्री, तकनीकी विशेषज्ञ और आपात सहायता पहुंचाई।
नेपाल में बाढ़ से अब तक 1,204 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,700 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। तिब्बत में भी 21 लोगों की जान गई है। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं के कर्मचारी अब तक लापता हैं और आशंका है कि कुछ लोग सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।
भारत ने बुधवार को नेपाल के लिए पांचवीं राहत उड़ान भेजी। इसमें 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल, अत्याधुनिक रेस्क्यू उपकरण और 5.5 टन आवश्यक दवाइयां शामिल हैं। इससे पहले चार उड़ानों के जरिए करीब 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। भारतीय डीएनए फोरेंसिक विशेषज्ञ शवों की पहचान में भी मदद कर रहे हैं, ताकि अवशेषों को उनके परिजनों को सौंपा जा सके।
प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु खतरों की गंभीर चेतावनी है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है और इससे निपटना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।
बाढ़ के बाद नेपाल में कई नदियां अब भी चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही हैं। वहीं, राहत अभियान के दौरान मलबे में चार दिन तक दबे पांच वर्षीय बच्चे को जिंदा बचाए जाने से बचाव दलों को बड़ी सफलता मिली है। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा है, ताकि डीएनए जांच के जरिए उनकी पहचान सुरक्षित रखी जा सके।
भारत की लगातार सहायता से नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव अभियान को जरूरी तकनीकी और मानवीय सहयोग मिल रहा है।


