फर्रुखाबाद। गंगा का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को कुछ राहत मिलने लगी थी, लेकिन अब रामगंगा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की चिंता फिर बढ़ा दी है। बुधवार को गंगा नदी का जलस्तर 136.65 मीटर दर्ज किया गया, जबकि रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़कर 136.10 मीटर पहुंच गया। मंगलवार को रामगंगा का जलस्तर 136.05 मीटर था। यानी 24 घंटे में रामगंगा के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है।
गंगा का जलस्तर भले ही नीचे आने लगा हो, लेकिन यह अभी भी चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से पांच सेंटीमीटर ऊपर है। खतरे का निशान 137.10 मीटर है। ऐसे में गंगा के घटते पानी से फिलहाल कुछ राहत जरूर है, लेकिन बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। शमसाबाद के तराई क्षेत्र, गंगापार और सदर तहसील के निचले इलाकों में अभी भी बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। कई गांवों में ग्रामीणों को आवागमन, पशुओं के चारे और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
इधर, रामगंगा के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे गांवों में बेचैनी बढ़ा दी है। कोलासोता, हरपालपुर, महोलिया, अलादादपुर भटौली, रेंगापुर, नहरैया और खरगपुर समेत दो दर्जन से अधिक गांवों में ग्रामीण नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। कई स्थानों पर नदी का कटान भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रामगंगा इसी गति से बढ़ती रही तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं और पिछले दिनों जैसी बाढ़ की स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है।
बाढ़ की मार झेल चुके ग्रामीण अभी पूरी तरह संभल भी नहीं पाए हैं। ऐसे में गंगा के बाद रामगंगा का बढ़ना प्रशासन के लिए भी नई चुनौती बन गया है। ग्रामीणों ने नदी के जलस्तर और कटान की लगातार निगरानी किए जाने के साथ संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में समय रहते जरूरी इंतजाम किए जाने की मांग की है।


