जलस्तर 137.15 मीटर पहुंचा, नरौरा से 1.10 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया; रामगंगा भी उफान पर
फर्रुखाबाद। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने फर्रुखाबाद में बाढ़ का संकट और गहरा दिया है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 137.15 मीटर पर पहुंच गया, जो जिले के खतरे के निशान 137.10 मीटर से 5 सेंटीमीटर ऊपर है। पिछले दिन जलस्तर 137.10 मीटर पर था। लगातार बढ़ रहे पानी के कारण जिले में 100 से अधिक गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं।
बाढ़ के बीच नरौरा बांध से गंगा में 1,10,176 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इससे आने वाले समय में गंगा के जलस्तर पर दबाव बने रहने की आशंका है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों में भी नरौरा बैराज से बड़े डिस्चार्ज की स्थिति दर्ज है।
वहीं रामगंगा नदी का जलस्तर शुक्रवार को 136.05 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले स्तर 136.10 मीटर से मामूली कम है। खो-हरेली-रामनगर बैराज से रामगंगा में 13,380 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी है।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर अमृतपुर तहसील क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। यहां 50 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। सदर, अमृतपुर और कायमगंज तहसील क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर बना हुआ है। इससे ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
कई गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। कहीं ग्रामीण नाव का सहारा ले रहे हैं तो कहीं ट्रैक्टर से आवागमन करना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, दवाओं और पशुओं के चारे की समस्या भी बढ़ रही है। कुछ गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
जलस्तर बढ़ने के साथ गंगा का कटान भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पहले ही कई स्थानों पर मकान और झोपड़ियां कटान की भेंट चढ़ चुकी हैं। शमसाबाद क्षेत्र के प्रभावित गांवों में ग्रामीण अपने घरों को खुद तोड़कर सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को मजबूर हैं।
अमृतपुर के कई इलाकों में पहाड़ी और तटवर्ती जमीन के कटने से ग्रामीणों में दहशत है। लगातार बढ़ते पानी के बीच प्रशासन को कटान प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखनी पड़ रही है।
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। प्रभावित ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव और मोटरबोट उपलब्ध कराई गई हैं। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बाढ़ प्रभावित गांवों का सर्वे और पुनर्सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं, जिसमें जलभराव के साथ कटान वाले क्षेत्रों को भी शामिल किया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार और शनिवार को फर्रुखाबाद में बादल छाए रहने तथा हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है।
गंगा का खतरे का निशान 137.10 मीटर है और शुक्रवार को जलस्तर उससे 5 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों के लिए अगले 24 से 48 घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ग्रामीणों को नदी, कटान वाले स्थानों और तेज बहाव वाले रास्तों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
गंगापार में अब चुनौती सिर्फ बढ़ते जलस्तर की नहीं, बल्कि पानी के साथ बढ़ते कटान और प्रभावित गांवों तक जरूरी सामान पहुंचाने की भी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता तटवर्ती आबादी को सुरक्षित रखना और जलस्तर में आगे होने वाली वृद्धि पर लगातार नजर बनाए रखना है।


