प्रयागराज पुलिस की गैंगस्टर एक्ट की FIR रद्द
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए शिवकुटी थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट की प्राथमिकी रद्द कर दी। अदालत ने पाया कि पुलिस ने गैंगचार्ट तैयार करते समय महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की। जिन आरोपियों को अदालत से काफी पहले जमानत मिल चुकी थी, उन्हें गैंगचार्ट के कॉलम-8 में जेल में बंद दिखा दिया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर रूल्स, 2021 के नियम 5(3)(a) के तहत कमिश्नर और डीसीपी के बीच आमने-सामने बैठकर संयुक्त बैठक किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद अधिकारियों ने 18 नवंबर 2025 को वास्तविक बैठक किए बिना अलग-अलग फाइलों पर हस्ताक्षर कर औपचारिकता पूरी कर दी।
हाईकोर्ट ने इसे गंभीर कानूनी खामी मानते हुए कहा कि इस तरह की प्रक्रिया किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकारों पर गंभीर असर डाल सकती है। अदालत ने शिवकुटी थाने में अपराध संख्या 186/2025 के तहत दर्ज गैंगस्टर एक्ट की पूरी एफआईआर को निरस्त कर दिया।
साथ ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया है कि संबंधित थाने की जनरल डायरी में लाल स्याही से स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए कि अदालत के आदेश के बाद यह कानूनी कार्यवाही पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। हाईकोर्ट के इस फैसले से पुलिस की जांच और गैंगचार्ट तैयार करने की प्रक्रिया में बरती जाने वाली सावधानी को लेकर कड़ा संदेश गया है।


