बच्चों में खांसी-जुकाम, बुखार व वायरल संक्रमण के मामले अधिक, घायल बच्ची के पैर में लगाए चार टीके
अमृतपुर,
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमृतपुर में रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया गया। मेले में अमृतपुर सहित आसपास के करीब 20 से 30 किलोमीटर क्षेत्र के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण उपचार कराने पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मेले में कुल 218 मरीजों का पंजीकरण हुआ। चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श देने के साथ निःशुल्क दवाएं वितरित कीं।रविवार होने के कारण सुबह से ही पीएचसी पर मरीजों की भीड़ जुटने लगी। पंजीकरण के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों की जांच की और बीमारी के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया। मेले में बच्चों की संख्या भी अधिक रही। पीएचसी प्रभारी चिकित्सक डॉ. गौरव वर्मा ने बताया कि बच्चों में खांसी-जुकाम, बुखार और वायरल संक्रमण के मामले अधिक सामने आए। जांच के बाद बच्चों को आवश्यक दवाएं दी गईं और अभिभावकों को मौसम में बदलाव के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई।मेले में विभिन्न बीमारियों की जांच भी की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मलेरिया के 18, टाइफाइड के 16, शुगर के 21, बलगम के 8, हीमोग्लोबिन के 6, हेपेटाइटिस-बी के 5 तथा डेंगू के 6 मरीजों की जांच की। जांच के बाद मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सलाह और उपचार उपलब्ध कराया गया।मेले के दौरान बेचपट्टी निवासी बलबंत की पुत्री इंजल भी उपचार के लिए पीएचसी पहुंची। बताया गया कि बकरियां चराते समय उसका पैर हेरो से कट गया था, जिससे गहरा घाव हो गया। चिकित्सक डॉ. गौरव वर्मा ने बच्ची के पैर में चार टांके लगाए और आवश्यक उपचार किया।
इसके अलावा बंदर और कुत्ते के काटने से पीड़ित मरीजों को भी आवश्यक इंजेक्शन लगाए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को सलाह दी कि पशु के काटने की स्थिति में देरी न करें और तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार कराएं मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में परतापुर, लीलापुर, हरसिंहपुर, कुड़री सारंगपुर, मंझा, फखरपुर और माखन नगला समेत आसपास के कई गांवों से ग्रामीण पहुंचे। ग्रामीणों ने एक ही स्थान पर जांच, चिकित्सकीय परामर्श और निःशुल्क दवा मिलने को काफी उपयोगी बताया।मेले की व्यवस्थाएं डॉ. गौरव वर्मा के नेतृत्व में संभाली गईं। फार्मासिस्ट अरविंद कुमार, लैब टेक्नीशियन पवन कुमार और सोनाली पाल समेत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। टीम ने पंजीकरण, जांच, उपचार और दवा वितरण की व्यवस्थाएं संभालीं। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की कि मौसम में बदलाव के चलते बुखार, खांसी-जुकाम या वायरल संक्रमण के लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लें।


