नई दिल्ली/इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) के योजना मंत्री अहसान इकबाल (Ahsan Iqbal) ने भारत के साथ जारी तनाव के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) और दक्षिण एशिया में भारत (India) की भूमिका को लेकर अहम बयान दिया है। उनके बयानों से एक ओर पाकिस्तान की जल सुरक्षा को लेकर चिंता सामने आई है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता में भारत की केंद्रीय भूमिका को भी स्वीकार किया है।
अहसान इकबाल ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के सामने अब यह खतरा स्पष्ट है कि भारत अपनी भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल करते हुए जरूरत के समय पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। उनका तर्क है कि भारत से होकर पाकिस्तान में आने वाली प्रमुख नदियों के कारण नई दिल्ली को जल प्रवाह पर रणनीतिक बढ़त हासिल है।
पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था सिंधु नदी प्रणाली पर काफी निर्भर है। ऐसे में जल प्रवाह को लेकर किसी भी तरह का तनाव इस्लामाबाद के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को ‘एबेयंस’ में रखने का फैसला किया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करता, तब तक संधि को सामान्य स्थिति में बहाल नहीं किया जाएगा।
वहीं, पाकिस्तान भारत के इस फैसले को एकतरफा और गैरकानूनी बताता रहा है। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच लंबे समय से जल बंटवारे का आधार रही है। अहसान इकबाल के दूसरे बयान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित है और क्षेत्र के बाकी देश उसके आसपास की परिधि में हैं। उनके मुताबिक दक्षिण एशिया के प्रभावी ढंग से काम करने के लिए भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत का आकार, अर्थव्यवस्था और भौगोलिक स्थिति उसे क्षेत्रीय राजनीति में स्वाभाविक रूप से प्रभावशाली बनाती है। पाकिस्तान की ओर से यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। अहसान इकबाल के दोनों बयानों को साथ देखें तो पाकिस्तान की रणनीतिक दुविधा स्पष्ट होती है। एक तरफ वह भारत पर जल को हथियार बनाने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय शांति और सहयोग के लिए भारत की भूमिका को अनिवार्य मान रहा है।


