(डॉ. सुधाकर आशावादी-विभूति फीचर्स)
छोटी छोटी घटनाओं के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना आजकल फैशन बन चुका है। जो लोग अपने घर की किचन से खुद एक गिलास पानी लेकर नहीं पीते। सोशल मीडिया पर वे स्वयं को बड़ा क्रान्तिकारी सिद्ध करने पर तुले रहते हैं। हाल ही में लद्दाख के मिनी मार्ग चेक पोस्ट का एक वीडियो प्रकाश में आया, जिसमें एक महिला पर्यटक सुरक्षा कर्मियों से बहस कर रही है तथा स्वयं को जेन जी बताते हुए सेना द्वारा किसी मार्ग पर आवाजाही रोकने के विरोध में सेना के अधिकारियों को बता रही है, कि वे उसके टैक्स से ही वेतन पाते हैं, तो उनका मार्ग अवरुद्ध क्यों किया गया। मार्ग खुलने की प्रतीक्षा में खड़े अन्य वाहन चालकों को उकसाती हैं। जब से देश में जगह जगह लोकतंत्र की अभिव्यक्ति के नाम पर लोगों को आंदोलन करने, अराजकता फ़ैलाने की छूट मिली है, हर कोई अपने आपको जननायक समझने लगा है। उनके निशाने पर देश के रक्षा कवच सैनिकों से लेकर देश के गृहमंत्री, प्रधानमंत्री तक सभी रहते हैं। जिन्हें उनके घर में उचित सम्मान नहीं मिलता, वे भी हर मुद्दे पर प्रधानमंत्री से जवाबदेही की अपेक्षा करते हैं।
बहरहाल सोशल मीडिया पर अनेक ऐसे वीडियो प्रसारित हो रहे हैं, जो देश में अराजक तत्वों की समाज व राष्ट्र विरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं, किन्तु समय रहते उन पर दंडात्मक कार्यवाही न होने से उनके हौसले इतने बढ़ जाते हैं, कि वे अपने सम्मुख किसी को कुछ भी नहीं समझते। कहीं जातिवादी जहर उगल कर व्यक्तिगत बयानों के विरुद्ध भीड़ को उकसाते हैं तथा कहीं अन्य किसी प्रकार से समाज में विघटन की खाई बढ़ाने में बड़ी भूमिका का निर्वाह करते हैं। सच तो यह है कि कोई यह नहीं समझ सकता कि विभिन्न विद्वेषकारी घटनाओं की वीडियो पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत बनाई जाती है या सामान्य तरीके से किसी की निजी ज़िंदगी में दखल देने के लिए। क्या किसी होटल, रेस्तराँ, सार्वजनिक परिवहन या किराए पर चल रहे वाहनों में बैठे किसी समूह या मित्रों की आपसी बातचीत में किसी बेयरे, कार चालक या अन्य किसी यात्री को दखल देने का कोई क़ानूनी अधिकार है ? यदि नहीं, तो आ बैल मुझे मार जैसी हरकतें करने का औचित्य क्या है।
कहने का आशय यह है कि समाज में हर किसी को इस प्रकार के स्वच्छंद आचरण को छूट क्यों मिल रही है ? कौन नहीं जानता, कि देश की बाह्य और आंतरिक सुरक्षा के लिए संवेदनशील जगहों पर आम आदमी का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। विशेषकर सैनिक क्षेत्रों में। इससे इतर भी कुछ कार्यालयों में बिना विशेष औपचारिकता निभाए प्रवेश पर पाबंदी रहती है। ऐसे में स्वयं को जेन जी या क्रांतिकारी दर्शाकर सुरक्षा में सेंध लगाने की छूट किसी को भी किस आधार पर दी जा सकती है। सो अनिवार्य है, कि किसी भी नागरिक की अनुशासनहीनता को किसी भी स्तर पर स्वीकार न किया जाए तथा संवेदनशील विषयों में दखल देने का प्रयास करने वाले तत्वों के विरुद्ध दंडनीय कार्यवाही करने में कोई संकोच न हो। (विभूति फीचर्स)


