– 289 खाली सिलेंडर अधिक मिले, 313 भरे सिलेंडर कम; गैस निकासी का रजिस्टर भी नहीं मिला
लखनऊ। राजधानी में सहकारी इंडेन गैस सर्विस की जांच के दौरान सिलेंडरों के स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। अस्ती रोड स्थित शोरूम और धनोहरी गोदाम की जांच में 289 खाली सिलेंडर अधिक और 313 भरे सिलेंडर कम पाए गए। मामले में एजेंसी के प्रभारी प्रबंधक समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जांच के दौरान स्टॉक का मिलान किए जाने पर भरे और खाली सिलेंडरों की संख्या में भारी अंतर मिला। इसके अलावा मौके पर गैस निकासी से संबंधित कोई रजिस्टर भी नहीं मिला। इससे अधिकारियों को एजेंसी में गैस सिलेंडरों की खरीद-बिक्री और निकासी के रिकॉर्ड को लेकर संदेह गहरा गया है।
मामले में प्रभारी प्रबंधक सुरेश कुमार, कैशियर तेज कुमार द्विवेदी और गोदाम प्रभारी गुड्डू भंडार को आरोपी बनाया गया है। तीनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जांच अधिकारियों के अनुसार स्टॉक में मिले अंतर और अभिलेखों की कमी को गंभीरता से लिया गया है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निर्धारित स्टॉक के मुकाबले भरे सिलेंडर कम और खाली सिलेंडर अधिक कैसे हो गए।
प्रारंभिक जांच में सिलेंडरों की संभावित कालाबाजारी में मिलीभगत का संदेह जताया गया है। हालांकि आरोपों की पुष्टि विस्तृत जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही होगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कम पाए गए भरे सिलेंडरों का इस्तेमाल कहां और किस तरीके से किया गया।
अस्ती रोड स्थित शोरूम और धनोहरी गोदाम की जांच के दौरान गैस निकासी का रजिस्टर नहीं मिलने से भी सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में एजेंसी के पुराने स्टॉक, बिक्री, वितरण और गोदाम से सिलेंडरों की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और संबंधित विभाग की जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों द्वारा एजेंसी के दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री और वितरण से जुड़े अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सिलेंडरों में अंतर किस वजह से हुआ और इसके पीछे किसी संगठित कालाबाजारी का नेटवर्क था या नहीं।
गैस सिलेंडर जैसी आवश्यक वस्तु में स्टॉक का इतना बड़ा अंतर सामने आने से उपभोक्ताओं के हितों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। यदि जांच में अनियमितता या कालाबाजारी की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


