नई दिल्ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को दिल्ली में जापानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और जापान के गवर्नर कोटारो नागासाकी का जन्मदिन भी मनाया। मुख्यमंत्री ने उन्हें भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट की। अपने संबोधन के अंत में योगी ने जापानी भाषा में ‘अरिगातो गोजैमासु’ कहकर धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने जापान की प्रसिद्ध विचारधारा ‘इचिगो इचिए’ का उल्लेख करते हुए कहा कि हर पल और हर मुलाकात अद्वितीय होती है। उन्होंने भारत और जापान के सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में भगवान बुद्ध की करुणा, जीवन का अनुशासन और मध्यम मार्ग जैसे साझा मूल्य जुड़े हैं।
योगी ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं सदियों पहले उत्तर प्रदेश की धरती से जापान पहुंचीं। उन्होंने 752 ईस्वी में जापान के नारा स्थित तोदाई-जी मंदिर में विशाल बुद्ध प्रतिमा के नेत्रोन्मीलन समारोह में भारतीय आचार्य बोधिसेन की भूमिका का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-जन के संबंध अब आधुनिक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के नेतृत्व ने इन संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी रासबिहारी बोस के जापान से जुड़े योगदान को भी याद किया।
18 से 23 अगस्त तक चल रहे उत्तर प्रदेश-जापान निवेश सम्मेलन में जापान के 200 से अधिक प्रमुख उद्योगपति और कंपनियों के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जापानी कंपनियों के बड़े निवेश की तैयारी है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र में एस्कॉर्ट्स कुबोटा के करीब 2,025 करोड़ रुपये और मिंडा की दो परियोजनाओं में करीब 1,166 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इन परियोजनाओं से 10 हजार से अधिक रोजगार मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में 500 एकड़ जमीन पर जापानी शहर विकसित करने की योजना है। यहां जापानी कंपनियों के साथ उनके सहायक उद्योग और आपूर्तिकर्ता भी स्थापित किए जाएंगे।


