– सेवा करने वालों का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, सुविधाओं और सुरक्षा से भी होना चाहिए
प्रदेश की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में वर्षों से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे प्रांतीय रक्षक दल यानी पीआरडी के स्वयंसेवकों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई घोषणाएं केवल आर्थिक लाभ की खबर नहीं हैं, बल्कि उन हजारों कर्मियों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का संकेत भी हैं, जो आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखाई देते हैं।
गोरखपुर में आयोजित पीआरडी जवानों के सम्मेलन और कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री ने 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके साथ ही दैनिक ड्यूटी भत्ते को 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये करने का निर्णय लिया गया। दोनों फैसलों को अलग-अलग देखने के बजाय पीआरडी स्वयंसेवकों के आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।
पीआरडी स्वयंसेवक नियमित पुलिस बल का हिस्सा नहीं होते, लेकिन जब भी किसी बड़े आयोजन, चुनाव, यातायात व्यवस्था, राजस्व कार्य, आपदा अथवा कानून-व्यवस्था से जुड़ी अतिरिक्त जरूरत सामने आती है, उनकी सेवाएं ली जाती हैं। कई बार उन्हें कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। धूप, बारिश, भीड़ और तनाव के बीच व्यवस्था संभालना आसान काम नहीं है। इसके बावजूद पीआरडी जवान सीमित संसाधनों में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे हैं।
ऐसे में चिकित्सा सुरक्षा का प्रश्न बेहद महत्वपूर्ण है। बीमारी किसी पद या आर्थिक स्थिति को देखकर नहीं आती। किसी स्वयंसेवक या उसके परिवार में गंभीर बीमारी आने पर इलाज का खर्च पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को हिला सकता है। 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा इस चिंता को काफी हद तक कम करने में सहायक हो सकती है। खासतौर पर उन परिवारों के लिए जिनके लिए निजी अस्पताल में महंगा इलाज कराना आसान नहीं होता।
दूसरी महत्वपूर्ण घोषणा दैनिक ड्यूटी भत्ते में बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2019 तक पीआरडी स्वयंसेवकों को 250 रुपये प्रतिदिन मिलते थे। इसे 2019 में 375 रुपये, 2022 में 395 रुपये और 2025 में 500 रुपये किया गया। अब इसे बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने की घोषणा की गई है। यानी 2019 के मुकाबले वर्तमान प्रस्तावित दर में 350 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि होगी और 500 रुपये की मौजूदा दर से 100 रुपये अधिक मिलेंगे।
यदि कोई स्वयंसेवक पूरे 30 दिन ड्यूटी करता है तो 600 रुपये प्रतिदिन की दर से उसका ड्यूटी भत्ता 18 हजार रुपये होगा। हालांकि वास्तविक भुगतान उसके द्वारा किए गए ड्यूटी दिवसों पर निर्भर करेगा। इसलिए इस फैसले का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा जब ड्यूटी की उपलब्धता और भुगतान व्यवस्था भी समयबद्ध और पारदर्शी रहे।
यहां सरकार के सामने एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। भत्ता बढ़ाना स्वागतयोग्य है, लेकिन समय पर भुगतान सुनिश्चित करना उससे भी अधिक जरूरी है। स्वयंसेवक जिस दिन ड्यूटी करता है, उसका भुगतान निर्धारित समय में मिले, इसके लिए व्यवस्था को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से मजबूत किया जाना चाहिए। किसी भी स्तर पर भुगतान लंबित रहने की स्थिति में बढ़ी हुई दर का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।
पीआरडी व्यवस्था को केवल आवश्यकता पड़ने पर जवान उपलब्ध कराने वाली प्रणाली के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन स्वयंसेवकों का नियमित प्रशिक्षण, बेहतर वर्दी और उपकरण, दुर्घटना या ड्यूटी के दौरान सुरक्षा, महिला स्वयंसेवकों के लिए विशेष सुविधाएं और सम्मानजनक कार्य वातावरण भी सरकार की प्राथमिकताओं में होना चाहिए।
प्रदेश में कानून-व्यवस्था और बड़े आयोजनों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। धार्मिक आयोजन, मेले, चुनाव, यातायात प्रबंधन, आपदा और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में प्रशिक्षित पीआरडी स्वयंसेवक प्रशासन के लिए अतिरिक्त मानवबल के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन मिलें तो उनकी उपयोगिता और बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं का सबसे सकारात्मक पक्ष यह है कि इसमें स्वयंसेवक के साथ उसके परिवार को भी केंद्र में रखा गया है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा केवल जवान की नहीं, उसके परिवार की चिंता को भी संबोधित करती है। यही किसी कल्याणकारी व्यवस्था की वास्तविक कसौटी है।
हालांकि अब घोषणाओं से आगे बढ़कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन की परीक्षा होगी। कितने अस्पताल योजना से जुड़े हैं, कैशलेस सुविधा प्राप्त करने की प्रक्रिया कितनी सरल है, कार्ड बनाने में कितना समय लगता है, आपात स्थिति में इलाज कैसे मिलेगा और किसी अस्पताल में तकनीकी कारणों से इलाज रोकने की स्थिति में शिकायत का समाधान कितनी जल्दी होगा,इन सवालों के स्पष्ट जवाब भी व्यवस्था को देने होंगे।
सरकार ने पीआरडी जवानों को आर्थिक राहत और चिकित्सा सुरक्षा देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब आवश्यकता है कि सम्मान, सुरक्षा, प्रशिक्षण और समय पर भुगतान को भी इसी व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बनाया जाए।
पीआरडी जवान वर्दी पहनकर केवल ड्यूटी नहीं करते, वे शासन की उस व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं जो संकट के समय आम आदमी के बीच खड़ी होती है। इसलिए उनका सम्मान भी केवल मंच से तालियां बजाकर नहीं, बल्कि उनके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करके होना चाहिए।
600 का दैनिक भत्ता और 5 लाख तक का कैशलेस इलाज शुरुआत भर है। असली सफलता तब होगी, जब प्रदेश का प्रत्येक पीआरडी स्वयंसेवक यह महसूस करे कि जिस सरकार के लिए वह संकट की घड़ी में खड़ा होता है, वह सरकार भी उसके और उसके परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।


