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Tuesday, August 11, 2026

विकसित भारत जी राम पर रहेगी सैटेलाइट की नजर, इसरो की मदद से अब फेस सत्यापन से होगी मजदूरों की पहचान

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प्रशांत कटियार

नई दिल्ली। ग्रामीण रोजगार योजना में पारदर्शिता के लिए सरकार ने व्यवस्था को और हाईटेक कर दिया है। अब केवल मस्टर रोल में नाम दर्ज होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि काम पर पहुंचने वाले मजदूर की पहचान फेस ऑथेंटिकेशन से सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, जिस काम के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है, वह जमीन पर वास्तव में हुआ है या नहीं, इसकी निगरानी सैटेलाइट तस्वीरों और जियो-टैगिंग के जरिए की जाएगी।

विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन के तहत पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति दर्ज करने के लिए चेहरे का सत्यापन और कार्यस्थल की निगरानी के लिए जियो-टैगिंग को प्रमुख व्यवस्था बनाया गया है।

काम की जगह और वहां बनाई जा रही सड़क, तालाब तथा दूसरी परिसंपत्तियों की निगरानी में इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की तकनीकी मदद ली जा रही है। सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों के जरिए यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिकॉर्ड में दर्ज विकास कार्य वास्तव में मौके पर मौजूद है या नहीं।

इसरो के भुवन प्लेटफॉर्म पर ‘भूग्राम’ नाम की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है। इसमें पूरे हो चुके और चल रहे कार्यों की जानकारी नक्शे पर दर्ज की जाती है। इससे एक ही गांव में पहले से मौजूद तालाब, सड़क या अन्य परिसंपत्ति को दोबारा नया काम दिखाकर भुगतान लेने की गुंजाइश कम होगी।

पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना तैयार करने के लिए ‘युक्तधारा’ प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके माध्यम से अब तक करीब 26.97 लाख कार्यों की योजनाएं तैयार की जा चुकी हैं। इनमें 6.03 लाख कार्य ग्रामीण रोजगार योजना से जुड़े हैं, जबकि करीब 2.27 लाख कार्य फिलहाल जारी हैं।

फोटो आधारित हाजिरी, जियो-टैगिंग, जीआईएस और सैटेलाइट निगरानी को जोड़कर सरकार ने ग्रामीण रोजगार कार्यों में फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

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