नई दिल्ली। पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को अब इसकी पैकेजिंग बदलनी होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पान मसाला की पैकिंग में प्लास्टिक, पॉलीथीन, पीवीसी, पॉलिएस्टर और सिंथेटिक पॉलिमर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। नए नियम 10 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ लागू हो गए हैं।
नए प्रावधानों के तहत पान मसाला की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक-मुक्त कागज, पेपरबोर्ड, सेल्यूलोज और अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा टिन के डिब्बे और कांच के कंटेनर भी विकल्प होंगे। कंपनियां कागज की बाहरी परत लगाकर अंदर प्लास्टिक या एल्युमिनियम की परत का इस्तेमाल भी नहीं कर सकेंगी।
एफएसएसएआई के मुताबिक, यह बदलाव पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक कचरे को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। प्लास्टिक और फॉयल वाले पाउच लंबे समय तक नष्ट नहीं होते, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।
गुटखा-पान मसाला की बिक्री पर रोक नहीं
नए नियम पान मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगाते, बल्कि केवल उसकी पैकेजिंग से जुड़े हैं। हालांकि, नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर खाद्य सुरक्षा कानून और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें जुर्माने के साथ उत्पादन रोकने या लाइसेंस पर कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है।
प्लास्टिक पाउच की तुलना में कागज, टिन और कांच की पैकेजिंग महंगी पड़ने के कारण आने वाले समय में पान मसाला की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।


