नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के प्रभावी उपयोग से अब छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए सरकारी खरीद प्रणाली से जुड़ना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। पहले सरकारी खरीद से जुड़ी प्रक्रियाएं छोटे कारोबारियों के लिए काफी जटिल और समय लेने वाली मानी जाती थीं। टेंडर की जानकारी प्राप्त करना, विभिन्न विभागों की अलग-अलग शर्तों को समझना और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती होती थी। इसके कारण कई छोटे व्यवसाय सरकारी खरीद व्यवस्था में भाग नहीं ले पाते थे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को मजबूत बनाने और उन्हें सरकारी खरीद प्रक्रिया से जोड़ने के लिए लगातार कदम उठा रही है। सरकार का फोकस एमएसएमई के लिए नए बाजार उपलब्ध कराने, सरकारी खरीद में उनकी भागीदारी बढ़ाने और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल एवं समान अवसरों पर आधारित बनाने पर है। इसी दिशा में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जेम प्लेटफॉर्म के माध्यम से दिल्ली के छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को सरकारी विभागों और संस्थानों के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे उन्हें एक बड़ा, पारदर्शी और डिजिटल बाजार उपलब्ध हो रहा है, जहां वे अपने उत्पादों और सेवाओं को आसानी से सूचीबद्ध कर सकते हैं।
दिल्ली में सरकारी खरीद प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के बढ़ते उपयोग और सेवाओं की खरीद में लगातार बढ़ती भागीदारी के चलते दिल्ली को ‘सस्टेंड सर्विसेस प्रिक्यूरमेंट एडोप्शन’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान सरकारी विभागों द्वारा जेम प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाओं की खरीद में बढ़ती हिस्सेदारी और इसके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किए गए निरंतर प्रयासों की मान्यता के रूप में प्रदान किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली ने सरकारी खरीद प्रक्रिया में डिजिटल माध्यमों को अपनाने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।
दिल्ली में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से खरीद प्रक्रिया में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। जेम के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई तक 1,595 करोड़ रुपये की सरकारी खरीद दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 624 करोड़ रुपये की तुलना में 156 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि दिल्ली के छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई क्षेत्र के लिए बढ़ते अवसरों को दर्शाती है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली में जेम के माध्यम से कुल 4,311 करोड़ रुपये की सरकारी खरीद हुई, जो वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 41 प्रतिशत अधिक रही। इस कुल खरीद में सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) से हुई खरीद की हिस्सेदारी लगभग 2,177 करोड़ रुपये रही, जो एमएसएमई क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
पिछले कुछ वर्षों में एमएसई इकाइयों से सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2021-22 में जहां एमएसई से लगभग 965 करोड़ रुपये की खरीद हुई थी, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,177 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि सरकारी खरीद प्रणाली में छोटे कारोबारों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली के विक्रेताओं को प्राप्त लगभग 95 प्रतिशत ऑर्डर केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के सरकारी खरीदारों से मिले। इससे दिल्ली के एमएसएमई को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रहने के बजाय देशभर में अपने उत्पादों और सेवाओं का विस्तार करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।


