भुवनेश्वर। देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जेन-जी देश के ही बच्चे हैं और कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद ही शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। प्रधान ने कहा कि युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं के सामने मंत्री पद उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं था।
धर्मेंद्र प्रधान शनिवार को भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और नई पीढ़ी के विरोध को समझना जरूरी है। उनके अनुसार युवाओं की मांग और आकांक्षाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर प्रदर्शनकारी युवाओं की मांगों पर चर्चा की और उन्हें स्वीकार करने की मंजूरी मांगी। प्रधानमंत्री के सहमत होने के बाद युवाओं से बातचीत हुई और इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधान ने कहा, ‘‘मेरे लिए पद जरूरी नहीं था।’’
कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। इस पर प्रधान ने कहा कि वह एक किसान के बेटे हैं और विरोध या नारेबाजी से परेशान नहीं होते। उन्होंने कहा कि ओडिशा के सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला कोई काम नहीं करेंगे।
प्रधान ने कहा कि देश में हर साल बड़ी संख्या में बच्चे जन्म ले रहे हैं और नई पीढ़ी ही भविष्य में देश का नेतृत्व करेगी। उन्होंने युवाओं को बदलाव की ताकत बताते हुए कहा कि इतिहास में हर दौर में युवाओं ने बड़े बदलावों का नेतृत्व किया है।
नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे पहले भी वर्ष 1997 में ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन में धर्मेंद्र प्रधान के शामिल होने की बात सामने आ चुकी है।


