500 के नोटों से सजी कांवड़ और दादी को कंधों पर लेकर निकला पोता बने आकर्षण
वाराणसी। श्रावण मास के पहले दिन गुरुवार को उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, कानपुर, प्रतापगढ़ और अन्य जिलों के शिव मंदिरों में तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। काशी विश्वनाथ धाम में मंगला आरती के बाद से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए, जबकि मंदिर के बाहर करीब एक किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह वाराणसी पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना की, इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक और भस्म अर्पित की। सीएम ने मंदिर परिसर और काशी की गलियों का निरीक्षण कर श्रद्धालुओं व दुकानदारों से व्यवस्थाओं का हाल जाना तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि दर्शन-पूजन में किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। इस वर्ष भी पूरे सावन माह में काशी विश्वनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लागू रहेगी।
सावन के पहले दिन कांवड़ यात्रा भी पूरे शबाब पर दिखाई दी। मुजफ्फरनगर में दिल्ली निवासी एक शिवभक्त 500-500 रुपये के असली नोटों से सजी कांवड़ लेकर हरिद्वार से गंगाजल भरकर दिल्ली की ओर रवाना हुआ, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं गाजियाबाद पहुंचा एक युवक अपनी बुजुर्ग दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा कर रहा है। उसने बताया कि दादी से किया गया वचन पूरा करने के लिए वह प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर की यात्रा कर रहा है।
उधर, बरेली में कांवड़ यात्रा की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर डीजीपी राजीव कृष्ण, प्रमुख सचिव एस.पी. गोयल और नौ जिलों के जिलाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। पूरे प्रदेश में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष के बीच शिवभक्ति का उत्साह चरम पर रहा।


