नई दिल्ली। देशभर में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क पर शिकंजा कसने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 गुरुवार को राज्यसभा से भी पारित हो गया। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा से मंजूरी प्राप्त कर चुका था। अब इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा और मंजूरी मिलते ही यह पूरे देश में कानून के रूप में लागू हो जाएगा।
राज्यसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों ने लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। नया कानून ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
सरकार के अनुसार संशोधित कानून लागू होने के बाद पेपर लीक कराने वाले गिरोहों, परीक्षा प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले संगठनों, तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों और नकल माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। इससे भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा ईमानदारी से तैयारी करने वाले करोड़ों अभ्यर्थियों का भरोसा और मजबूत होगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि यह कानून केवल अपराधियों को दंडित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत निवारक व्यवस्था भी तैयार करेगा। इसके लागू होने से परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ेगी, तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और संगठित अपराध में शामिल लोगों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। सरकार का दावा है कि इससे देश की भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, नकल माफियाओं के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार होगा और युवाओं को उनकी मेहनत के अनुरूप निष्पक्ष अवसर मिल सकेगा।


