फर्रुखाबाद। आगामी जिला पंचायत चुनाव को लेकर जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी का रुख पहले जैसा नहीं दिख रहा। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि वर्तमान अध्यक्ष मोनिका यादव की दोबारा ताजपोशी आसान नहीं होगी। मोनिका यादव 2021 में भाजपा के समर्थन से जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं।
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि भाजपा के एक बड़े वर्ग में पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के परिवार, विशेषकर सचिन यादव की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बनी हुई है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित पक्ष की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
चर्चाओं के केंद्र में यह आरोप भी है कि पिछले पांच वर्षों में जिला पंचायत में अधिकांश कार्य उन लोगों को मिले, जिन्हें विपक्षी दल समाजवादी पार्टी से जुड़ा माना जाता रहा। वहीं, कुछ राजनीतिक विरोधियों का आरोप है कि जिला पंचायत में विकास कार्यों के आवंटन और कमीशन व्यवस्था को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में 40 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की किसी सक्षम एजेंसी या न्यायिक जांच से पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा के कई कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। आरोप यह भी लगाए जाते हैं कि पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव, सचिन यादव और मोनिका यादव का व्यवहार भाजपा संगठन के अनेक कार्यकर्ताओं के प्रति सकारात्मक नहीं रहा, जिससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा।
अब जिला पंचायत चुनाव की आहट के साथ भाजपा संगठन के भीतर नए समीकरण बनने की चर्चा है। यदि पार्टी नेतृत्व इस बार नया चेहरा या नई रणनीति अपनाता है तो फर्रुखाबाद का जिला पंचायत चुनाव बेहद रोचक हो सकता है। फिलहाल पार्टी ने उम्मीदवार या रणनीति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।


