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Sunday, July 26, 2026

विपक्ष को मुद्दा विहीन कर पीएम मोदी ने युवाओं की आवाज़ को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

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— शरद कटियार

भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी है, जो बड़े से बड़े फैसले लेने का साहस रखते हैं और दबाव की राजनीति के आगे आसानी से नहीं झुकते। पिछले एक दशक में देश ने अनेक बड़े आंदोलन और विरोध प्रदर्शन देखे, लेकिन केंद्र सरकार ने अधिकांश मामलों में अपने निर्णयों पर दृढ़ता बनाए रखी। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली को निर्णायक, स्पष्ट और परिणाम आधारित नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है।

हालिया छात्र आंदोलन ने हालांकि एक अलग संदेश दिया। कई दिनों तक चले घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार ने विद्यार्थियों की मांगों को गंभीरता से सुना और समाधान का रास्ता निकाला। इस निर्णय ने केवल एक आंदोलन का अंत नहीं किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सरकार देश के भविष्य यानी युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना जानती है। विपक्ष जिस मुद्दे को लंबे समय तक राजनीतिक हथियार बनाना चाहता था, वह सरकार के त्वरित निर्णय के बाद अपनी धार खो बैठा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अनेक ऐसे फैसले लिए हैं, जिन पर व्यापक बहस और विरोध हुआ, लेकिन सरकार अपने निर्णयों पर कायम रही। अनुच्छेद 370 हटाने का निर्णय, नई शिक्षा नीति, जीएसटी, तीन तलाक कानून, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन और बुनियादी ढांचे में रिकॉर्ड निवेश जैसे कदम इसी दृढ़ नेतृत्व की मिसाल माने जाते हैं।

केंद्र सरकार के अनुसार पिछले वर्षों में भारत ने दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाई है। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, रेलवे का आधुनिकीकरण, रिकॉर्ड डिजिटल भुगतान, करोड़ों बैंक खाते, करोड़ों घरों तक नल से जल, मुफ्त राशन योजना और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी योजनाओं ने शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा प्रस्तुत किया है। सरकार का कहना है कि इन पहलों ने पारदर्शिता और सेवा वितरण दोनों को मजबूत किया है।

छात्रों के मुद्दे पर सरकार का निर्णय यह भी दर्शाता है कि मजबूत नेतृत्व का अर्थ केवल कठोरता नहीं होता, बल्कि समय आने पर संवेदनशील निर्णय लेना भी उतना ही आवश्यक होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह संदेश दिया कि जब बात देश के युवाओं और उनके भविष्य की हो, तब संवाद और समाधान सर्वोपरि हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई कि उनसे इस्तीफा मांगा गया हो। ऐसे में उनका पद छोड़ना नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने की भावना के रूप में देखा जा सकता है। इससे यह संदेश गया कि सरकार जवाबदेही की परंपरा को भी महत्व देती है।

भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। करोड़ों युवा देश के विकास, नवाचार और आर्थिक प्रगति की सबसे बड़ी शक्ति हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का युवाओं के प्रति संवेदनशील रुख यह संकेत देता है कि सरकार विकास के साथ-साथ युवा विश्वास को भी अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कई बार यह दिखाया है कि वह राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर दृढ़ रह सकती है और आवश्यकता पड़ने पर संवाद के माध्यम से समाधान भी खोज सकती है। यही संतुलन किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सबसे बड़ी शक्ति होता है। हालिया निर्णय ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि केंद्र सरकार युवाओं की आकांक्षाओं को केवल सुनती ही नहीं, बल्कि समय आने पर उन्हें सम्मान भी देती है।

— लेखक यूथ इंडिया के संस्थापक और न्यूज़ ग्रुप के समूह संपादक हैं।

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