लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए मात्र छह वर्षीय बालिका की सफल रोबोटिक थायरॉयड शल्य चिकित्सा कर नया इतिहास रच दिया है। संस्थान का दावा है कि यह देश में अब तक की सबसे कम आयु की बालिका पर की गई सफल रोबोटिक थायरॉयड शल्य चिकित्सा है।
यह जटिल शल्य चिकित्सा अंतःस्रावी एवं स्तन शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ज्ञान चंद के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न की। अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक की सहायता से की गई इस शल्य चिकित्सा में अत्यधिक सटीकता बरती गई, जिससे बालिका को कम पीड़ा, कम रक्तस्राव और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में थायरॉयड ग्रंथि की शल्य चिकित्सा अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि गर्दन का हिस्सा अत्यधिक संवेदनशील होता है और उसके आसपास महत्वपूर्ण तंत्रिकाएं तथा रक्त वाहिकाएं होती हैं। ऐसे में रोबोटिक तकनीक शल्य चिकित्सकों को अधिक सटीकता और सुरक्षा के साथ ऑपरेशन करने में सहायता प्रदान करती है।
संस्थान के चिकित्सकों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एसजीपीजीआई ही नहीं, बल्कि देश के चिकित्सा जगत के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे यह सिद्ध हुआ है कि आधुनिक रोबोटिक तकनीक का उपयोग कर बच्चों में भी जटिल शल्य चिकित्सा सुरक्षित और सफलतापूर्वक की जा सकती है।
प्रोफेसर ज्ञान चंद और उनकी टीम की इस सफलता को चिकित्सा क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाली उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का विश्वास है कि भविष्य में इस तकनीक के माध्यम से अनेक जटिल रोगों का उपचार अधिक सुरक्षित, प्रभावी और कम कष्टदायक बनाया जा सकेगा।


