– जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन
विशेष संवाददाता, यूथ इंडिया
नई दिल्ली। 26 दिनों से देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुवार देर रात मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से हुई महत्वपूर्ण मुलाकात के बाद वांगचुक ने अपना उपवास तोड़ने का निर्णय लिया।
सूत्रों के अनुसार, दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक से करीब दस मिनट तक बातचीत की। इस दौरान आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों, छात्रों के हितों और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से सकारात्मक संवाद और मांगों पर गंभीरता से विचार का भरोसा मिलने के बाद वांगचुक ने आंदोलन के पहले चरण को समाप्त करने की घोषणा की।
अनशन समाप्त करने से पहले सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अधिकार है और सरकार को युवाओं का विश्वास जीतना चाहिए।
लगातार 26 दिनों के उपवास के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। चिकित्सकों की सलाह और न्यायालय के निर्देश के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।
सोनम वांगचुक के आंदोलन को छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों का समर्थन मिला। परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को लेकर यह आंदोलन राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया।
अनशन समाप्त करते हुए वांगचुक ने संकेत दिया कि यह आंदोलन का अंत नहीं बल्कि संवाद की नई शुरुआत है। यदि सरकार अपने आश्वासनों पर अमल नहीं करती, तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। फिलहाल 26 दिनों तक चले इस ऐतिहासिक अनशन का पहला चरण समाप्त हो गया है।


