– 105 फर्जी डिग्रीधारकों पर एफआईआर के आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के आपराधिक मामलों और फर्जी डिग्री के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए व्यापक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों का सामना कर रहे अधिवक्ताओं को अदालतों की गरिमा और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी में रखा जाना आवश्यक है।
अदालत के समक्ष पुलिस महानिदेशक, अभियोजन निदेशालय और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की रिपोर्ट में सामने आया कि प्रदेश के 5,14,439 सक्रिय पंजीकृत अधिवक्ताओं में से 4,157 अधिवक्ताओं के खिलाफ 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 418 अधिवक्ताओं पर तीन या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे लंबित हैं, जबकि 28 अधिवक्ताओं के खिलाफ 11 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। एक अधिवक्ता के विरुद्ध अकेले 46 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी लखनऊ में 905 अधिवक्ताओं के खिलाफ 575 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक मामले वजीरगंज थाने से जुड़े पाए गए, जहां 422 अधिवक्ताओं के विरुद्ध 236 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सचिव को निर्देश दिया है कि 105 फर्जी डिग्रीधारी अधिवक्ताओं के विरुद्ध धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। अदालत ने इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी के 4,157 वकीलों पर 5,056 आपराधिक मामले


