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Wednesday, September 2, 2026

आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय पर चलेगा बुलडोजर

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विकास प्राधिकरण का बड़ा एक्शन, अवैध निर्माण ध्वस्त करने का आदेश

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर में किए गए कई निर्माण कार्यों को स्वीकृत मानचित्र और भवन निर्माण नियमों के विपरीत बताते हुए अवैध घोषित किया है। आदेश के बाद विश्वविद्यालय परिसर पर बुलडोजर कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है, जिससे पूरे प्रदेश में इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है।

प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में कई भवन और अन्य निर्माण बिना विधिवत स्वीकृत नक्शे एवं आवश्यक अनुमति के तैयार किए गए। इस संबंध में लंबे समय से जांच और कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद विकास प्राधिकरण ने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश पारित कर दिया।

जांच में सामने आई नियमों की अनदेखी

रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित भवन उपविधियों और विकास प्राधिकरण के नियमों का पालन करने में विफल रहा। जांच के दौरान कई निर्माण स्वीकृत मानचित्र से अलग पाए गए। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया गया।

डीएम ने की कार्रवाई की पुष्टि

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने ध्वस्तीकरण आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि नियमों के विपरीत किए गए निर्माण पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन सभी मामलों में समान रूप से कानून का पालन कराता है और किसी भी अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। प्रशासन ने कार्रवाई को लेकर आवश्यक तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

सुरक्षा व्यवस्था रहेगी कड़ी

चूंकि मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए प्रशासन ने संभावित कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

विश्वविद्यालय प्रबंधन के सामने कानूनी विकल्प

ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के बाद अब सभी की नजरें विश्वविद्यालय प्रबंधन की अगली रणनीति पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रबंधन इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकता है या अन्य कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकता है। यदि अदालत से कोई राहत नहीं मिलती है, तो विकास प्राधिकरण नियमानुसार अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा

जौहर विश्वविद्यालय पहले भी कई मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। अब ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सभी निर्माण कार्य निर्धारित नियमों के अनुरूप ही होने चाहिए। वहीं, अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि आगे प्रशासन कब कार्रवाई करता है और विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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