प्रयागराज/संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में चर्चित 101 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले से जुड़े मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने की संभावना है। इस प्रकरण में नामजद आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस सुनवाई पर प्रशासन, जांच एजेंसियों और स्थानीय लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
मामला संभल नगर पालिका क्षेत्र की करीब 38 बीघा सरकारी भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि इस भूमि का नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कथित रूप से बंदरबांट की गई, जिससे सरकारी संपत्ति को लगभग 101 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया। जांच में इस पूरे प्रकरण में कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
इस मामले में भूमिया सईदुल रहमान तथा तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) राजकुमार गुप्ता समेत कुल 31 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि सरकारी भूमि के अभिलेखों और प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताएं बरतते हुए जमीन के स्वामित्व और उपयोग से संबंधित फैसले लिए गए।
जांच के दौरान पुलिस ने तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसके बाद पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।
इसी बीच मामले में नामजद कुछ आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर को निरस्त करने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष है कि उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमा विधिसम्मत नहीं है, जबकि दूसरी ओर जांच एजेंसियां अपने साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई को उचित बता रही हैं। अब इस विवाद पर हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाईकोर्ट एफआईआर निरस्त करने से इनकार करता है तो पुलिस जांच पूर्ववत जारी रहेगी। वहीं, यदि न्यायालय कोई अंतरिम राहत देता है तो जांच की दिशा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर उसका प्रभाव पड़ सकता है।


