डॉ विजय गर्ग
आज के डिजिटल युग में डॉक्टरों की भूमिका केवल अस्पतालों और क्लिनिकों तक सीमित नहीं रह गई है। अब वे सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों तक पहुंच रहे हैं, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दे रहे हैं और समाज को जागरूक बनाने का कार्य कर रहे हैं। भारत में बड़ी संख्या में डॉक्टर इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स और अन्य डिजिटल मंचों का उपयोग कर रहे हैं। यह एक नई सामाजिक और पेशेवर यात्रा है, जिसने चिकित्सा जगत को एक नया आयाम दिया है।
भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी हर व्यक्ति तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। इंटरनेट पर अनेक भ्रामक और अप्रमाणित जानकारियां उपलब्ध हैं, जिनके कारण लोग गलत उपचार अपनाने लगते हैं। ऐसे में डॉक्टर सोशल मीडिया के माध्यम से वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारी सरल भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। वे लोगों को बीमारियों के लक्षण, बचाव, टीकाकरण, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जागरूक बना रहे हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान सोशल मीडिया पर डॉक्टरों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। उन्होंने अफवाहों और गलत धारणाओं का खंडन किया तथा लोगों को सही स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल मंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य जागरूकता का प्रभावी माध्यम भी बन सकते हैं।
सोशल मीडिया डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद को भी अधिक सहज बनाता है। पहले जहां डॉक्टर केवल क्लिनिक में ही उपलब्ध होते थे, वहीं अब वे छोटे वीडियो, लाइव सत्र और पोस्ट के माध्यम से आम लोगों के प्रश्नों का उत्तर दे रहे हैं। इससे लोगों का विश्वास बढ़ता है और डॉक्टरों की मानवीय छवि भी सामने आती है।
युवा डॉक्टरों के लिए सोशल मीडिया पेशेवर विकास का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। वे अपनी विशेषज्ञता को साझा कर सकते हैं, चिकित्सा समुदाय के अन्य विशेषज्ञों से जुड़ सकते हैं और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे सकते हैं। इससे उनकी पहचान और विश्वसनीयता में भी वृद्धि होती है।
हालांकि, इस यात्रा के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। लोकप्रियता की दौड़ में चिकित्सा नैतिकता से समझौता नहीं किया जा सकता। डॉक्टरों को मरीजों की गोपनीयता बनाए रखने, वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारी देने और व्यावसायिक हितों से ऊपर जनहित को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।
भारतीय चिकित्सा समुदाय भी इस नए बदलाव को स्वीकार कर रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोशल मीडिया का सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो यह स्वास्थ्य शिक्षा और जनकल्याण का सशक्त साधन बन सकता है। इससे डॉक्टर अपनी सेवाओं का दायरा क्लिनिक की चारदीवारी से बाहर तक विस्तारित कर सकते हैं।
अंततः, भारतीय डॉक्टरों की सोशल मीडिया यात्रा केवल लोकप्रियता प्राप्त करने की कहानी नहीं है, बल्कि समाज से बेहतर जुड़ाव, स्वास्थ्य जागरूकता और ज्ञान के प्रसार की एक नई पहल है। आज का डॉक्टर केवल रोगों का उपचार करने वाला विशेषज्ञ नहीं, बल्कि डिजिटल युग का एक प्रभावी शिक्षक और जनसेवक भी बन चुका है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब


