नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिसके चलते अवकाशकालीन पीठ तत्काल हस्तक्षेप करे। अदालत ने टिप्पणी की कि “गर्मी की छुट्टियों के बाद नियमित पीठ में सुनवाई होने से कोई आसमान नहीं गिर जाएगा।” इसके साथ ही याचिका को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया। अब इस मामले पर 12 जुलाई के बाद सुनवाई होने की संभावना है।
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दाखिल याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त चढ़ावे में कथित गबन की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि आखिर इस मामले में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता क्या है। अदालत ने फिलहाल नोटिस जारी करने से भी इनकार कर दिया।
उधर, चढ़ावा प्रकरण में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को अयोध्या स्थित एंटी करप्शन लॉ स्पेशल कोर्ट में न्यायिक अभिरक्षा की कार्रवाई के लिए पेश किया जाना है। इससे पहले रिमांड मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
इसी बीच स्थानीय बार एसोसिएशन ने भी बैठक बुलाई है, जिसमें यह निर्णय लिया जाएगा कि बार के अधिवक्ता आरोपियों की ओर से पैरवी करेंगे या नहीं। दूसरी ओर पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। छापेमारी के दौरान नकदी, आभूषण, चाबियां और कई वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों सहित कई लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है और जांच के दौरान करीब 140 लोगों से पूछताछ किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई न मिलने के बाद अब इस चर्चित मामले में सभी की निगाहें नियमित सुनवाई और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


