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Friday, June 26, 2026

सांसदी गई, पद गया अब सुब्रत पर जीरो का ठप्पा, प्रदेश कार्यकारिणी में भी सुब्रत रहे खाली हाथ

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लखनऊ। विशेष संवाददाता। कन्नौज की राजनीति में जगह बना पाना और कन्नौज की जनता के बीच लंबे समय तक पसंदीदा बने रहना इतना आसान नहीं है। कन्नौज की धरती में कुछ ऐसा है कि यहां बड़े से बड़े नेताओं को जनता ने धूल चटाई है।

राजनीति के वर्तमान परिदृश्य की बात की जाए तो कन्नौज में विगत लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव से करीब 1.4 लाख से हार चुके सुब्रत पाठक भाजपा में अपनी जगह बनाने के लिए जद्दोजहद में जुटे हैं। लोगों का कहना है कि कन्नौज ने उन्हें इतना बड़ा मौका दिया लेकिन उन्होंने अपने व्यवहार से जनता के करीब न रहकर उल्टा जनता से दूरियां ही बढ़ाते गए।

लोगों का मानना है कि पहली बार सांसदी मिलते ही सुब्रत के अंदर अहंकार आ गया जिसके कारण कन्नौज में पत्रकार, जनता और प्रशासन से उनकी मारपीट के वाकये बढ़ते गए।

हालांकि अखिलेश यादव से बुरी तरह हारने के बाद सुब्रत अपनी कोई जमीन को वापस पाने के लिए जुगाड़ में लगे हैं। हालांक संगठन से सुब्रत को कुछ भी हाथ नहीं लग पा रहा। ऊपर से हाल ही में जारी प्रदेश कार्यकारिणी में भी सुब्रत ज़ीरो साबित हुए सबसे दिलचस्प बात यह रही कि एक दिन पहले कन्नौज आए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने उन्हें जीरो बताया था।

भाजपा के ही कुछ लोग बताते हैं कि सुब्रत टीवी चैनलों पर स्वयं ही कई बार अपना नाम प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चलवा चुके हैं। इतना ही नहीं राज्यसभा चुनाव से पहले भी वह अपना नाम केंद्रीय मंत्री के लिए चलवा चुके हैं। हालांकि यह सिर्फ टीवी चेनल तक ही सीमित रहा।

भाजपा के कुछ नेताओं का कहना है कि राजनीति में वो खुद बेरोजगार बैठे है और दूसरों को भी बेरोजगार करने के लिए अलग मिशन चला रहे हैं। वरिष्ठ भाजपा नेताओं का कहना है कि अखिलेश से हारने के बाद सुब्रत का प्रभाव संगठन में अब बचा नहीं है इसलिए भाजपा भी उन्हें अब सीरियस नहीं ले रही है और दूरी बनाए हुए हैं।

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