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Tuesday, February 24, 2026

महाबोधि महाविहार की मुक्ति को लेकर राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

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– डॉ. नवल किशोर शाक्य के नेतृत्व में नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा गया ज्ञापन

फर्रुखाबाद। बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने महाबोधि महाविहार, बोधगया को पूर्ण रूप से बौद्धों को सौंपने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। शुक्रवार को महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति, फर्रुखाबाद द्वारा नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से यह ज्ञापन दिया गया। इस दौरान समिति के प्रमुख डॉ. नवल किशोर शाक्य के नेतृत्व में बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे।

ज्ञापन में कहा गया कि बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। लेकिन वर्ष 1949 में बने महाबोधि टेंपल प्रबंधन अधिनियम के तहत इस पवित्र स्थल का पूर्ण नियंत्रण बौद्धों के हाथों में नहीं है। इसके बजाय इसमें गैर-बौद्धों का हस्तक्षेप बना हुआ है, जिससे बौद्ध अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि बौद्ध धर्म के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि उनके ही धर्मस्थल पर उनका पूरा अधिकार नहीं है। भारत के अलावा श्रीलंका, जापान, थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम और अन्य बौद्ध देशों के अनुयायियों ने भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है।

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:महाबोधि महाविहार टेंपल प्रबंधन अधिनियम 1949 को रद्द किया जाए और महाविहार का संपूर्ण नियंत्रण बौद्धों को सौंपा जाए। बौद्ध धर्म से जुड़ी सभी ऐतिहासिक मूर्तियां, शिलालेख और शिल्पकृतियां को बोधगया स्थित संग्रहालय में तत्काल स्थानांतरित किया जाए। महाबोधि महाविहार की प्रशासनिक समिति में केवल बौद्ध अनुयायियों को शामिल किया जाए, ताकि वे अपने धर्मस्थल का प्रबंधन स्वतंत्र रूप से कर सकें।भारत सरकार द्वारा महाबोधि महाविहार को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए और इसे पूरी तरह से बौद्ध धर्म की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाए।

डॉ. नवल किशोर शाक्य ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों को अनदेखा करती है, तो देशभर में बौद्ध अनुयायी व्यापक आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत के बौद्धों की ही नहीं, बल्कि विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों की भावना से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो देशव्यापी सत्याग्रह और धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे।

इस ज्ञापन अभियान में फर्रुखाबाद जिले के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी शामिल हुए। आंदोलन को कई बौद्ध संगठनों और बुद्धिजीवियों का समर्थन मिल रहा है। ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के अन्य पदाधिकारी और प्रमुख कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति ने देशभर के बौद्ध धर्मावलंबियों से एकजुट होने की अपील की है, ताकि यह आंदोलन और प्रभावी हो सके। समिति के अनुसार, यदि सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित बौद्ध अनुयायियों ने “महाबोधि महाविहार हमारी धरोहर है” और “बुद्ध के धरोहर पर हमारा अधिकार” जैसे नारे भी लगाए।

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