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Friday, June 5, 2026

वित्त विभाग मे जितनी मांग आती है, उसी के अनुरूप बजट आवंटित किया जाता है : सुरेश खन्ना

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फर्रुखाबाद दौरे पर बोले वित्त मंत्री, बाढ़ राहत से लेकर वृक्षारोपण तक सरकार गंभीर

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना शुक्रवार को निजी कार्यक्रम के सिलसिले में अचानक फर्रुखाबाद पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आवास विकास स्थित एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वरिष्ठ भाजपा नेत्री एवं प्रख्यात चिकित्सक डॉ. रजनी सरीन के आवास पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना।
मीडिया से बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने प्रदेश के बजट प्रबंधन, बाढ़ राहत और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। गंगा पार क्षेत्र में हर वर्ष आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान और उसके लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आवश्यकता के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराती है।
उन्होंने कहा, “वित्त विभाग के समक्ष जितनी मांग आती है, उसी के अनुरूप बजट का आवंटन किया जाता है। जहां जैसी आवश्यकता होती है, वहां उसी के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।”
वृक्षारोपण अभियान और पौधों के जीवित रहने की दर को लेकर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्थानों पर वृक्षारोपण किया जाना चाहिए ताकि पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक रहे।
सुरेश खन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अब तक प्रदेश में 242 करोड़ 13 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है और इस वर्ष भी लगभग 5 करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। मौसम चक्र में बदलाव, बढ़ता तापमान और पर्यावरणीय असंतुलन इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। ऐसे में केवल सरकार ही नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे।
वित्त मंत्री ने कहा, “पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। प्रत्येक व्यक्ति को पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण की भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। जितने अधिक पौधे सुरक्षित रहेंगे, उतना ही पर्यावरण शुद्ध और संतुलित होगा।”

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