नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही भाजपा, कांग्रेस समेत सभी प्रमुख दलों ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 8 जून नामांकन की अंतिम तिथि होगी, जबकि 18 जून को मतदान कराया जाएगा। चुनावी अधिसूचना जारी होते ही दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
राज्यसभा चुनाव को लेकर जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा प्रमुख बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी किसी दल ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
भाजपा के सामने जहां संगठन और सामाजिक समीकरणों को साधने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस और विपक्षी दल भी राज्यसभा के जरिए अपने प्रभावशाली चेहरों को संसद के उच्च सदन में भेजने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व राज्यों से फीडबैक लेकर उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने में जुटा है। वहीं विपक्षी गठबंधन भी उन राज्यों पर फोकस कर रहा है जहां मुकाबला रोचक हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव केवल सीटों का चुनाव नहीं होता, बल्कि इसके जरिए राजनीतिक दल अपने भविष्य के राष्ट्रीय नेतृत्व, संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक संदेश भी तय करते हैं। यही वजह है कि उम्मीदवार चयन को लेकर बंद कमरों में लगातार बैठकें चल रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्यसभा चुनाव का महत्व और बढ़ गया है। कई ऐसे नेताओं को राज्यसभा के रास्ते राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दी जा सकती है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण साबित हों।


