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Sunday, May 31, 2026

शीघ्र सुंदर दिखने की चाहत

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डॉ विजय गर्ग
आज के दौर में सुंदर दिखने की इच्छा केवल एक व्यक्तिगत पसंद नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक दबाव और प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन चुकी है। सोशल मीडिया, विज्ञापन और मनोरंजन उद्योग ने सौंदर्य के ऐसे मानक स्थापित कर दिए हैं, जिन्हें पाने की दौड़ में लोग शीघ्र परिणाम चाहते हैं। यही कारण है कि “जल्दी सुंदर दिखने” की चाहत लगातार बढ़ रही है।

मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चमकदार तस्वीरें और फ़िल्टरयुक्त चेहरे अक्सर वास्तविकता से दूर होते हैं, लेकिन लोग उन्हें ही आदर्श मान बैठते हैं। युवा वर्ग विशेष रूप से इस प्रभाव में आकर विभिन्न ब्यूटी प्रोडक्ट्स, कॉस्मेटिक उपचारों और त्वरित सौंदर्य बढ़ाने वाले उपायों का सहारा लेने लगता है। कई बार बिना पर्याप्त जानकारी के अपनाए गए ये उपाय त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी साबित हो सकते हैं।

सुंदरता केवल चेहरे की चमक या त्वचा के रंग तक सीमित नहीं है। वास्तविक सुंदरता स्वस्थ शरीर, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और अच्छे व्यवहार से भी झलकती है। दुर्भाग्य से त्वरित सुंदरता की चाहत लोगों को इन मूलभूत बातों से दूर कर देती है। वे रातों-रात बदलाव की उम्मीद करते हैं, जबकि स्वास्थ्य और आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण समय, अनुशासन और संतुलित जीवनशैली से होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और त्वचा की उचित देखभाल ही लंबे समय तक सुंदर और स्वस्थ बने रहने का सबसे प्रभावी तरीका है। इसके विपरीत, चमत्कारी दावों वाले उत्पाद और त्वरित उपचार अक्सर निराशा का कारण बनते हैं।

समाज को भी यह समझने की आवश्यकता है कि हर व्यक्ति की प्राकृतिक बनावट और सौंदर्य अलग होता है। यदि हम बाहरी रूप की बजाय व्यक्तित्व, प्रतिभा और चरित्र को अधिक महत्व दें, तो अनावश्यक सौंदर्य-दबाव कम हो सकता है।

अंततः, शीघ्र सुंदर दिखने की चाहत स्वाभाविक है, लेकिन इसे विवेक और आत्मस्वीकृति के साथ संतुलित करना आवश्यक है। स्थायी सुंदरता किसी जादुई उपाय से नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, आत्मविश्वास और स्वयं के प्रति सम्मान से प्राप्त होती है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

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