लखनऊ। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग को हाई अलर्ट पर रखते हुए प्रदेशभर में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गांव हो या शहर, किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और आम जनता को बिजली संकट का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए हर स्तर पर सतत मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय की जाए।
रविवार को लखनऊ में ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि भीषण गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण दौर में बिजली व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने या शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट पहुंच गई है। अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों से 9,120 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट बिजली राज्य को मिल रही है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2022 की तुलना में 2026 तक उत्पादन क्षमता में 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत एवं आधुनिक बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में तकनीकी बाधाओं को न्यूनतम रखा जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें और 715 उपकेंद्र संचालित हैं। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।
मुख्यमंत्री ने आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों में भी त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए तूफानों से 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे, लेकिन मरम्मत और बहाली का कार्य तेजी से पूरा कराया गया।
प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल और मई में तापमान बढ़ने के कारण बिजली की खपत में भारी उछाल आया है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन पहुंच गई, जबकि पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक दर्ज की गई। 20 से 22 मई के बीच उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।
मुख्यमंत्री ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालिक रणनीति पर भी जोर दिया। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2029 तक 10,719 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की तैयारी चल रही है, जिसमें विंड, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को उपभोक्ता हितैषी बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल मिलना चाहिए। प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर महीने पोस्टपेड आधार पर बिल जारी किए जाएंगे। साथ ही 15 मई से 30 जून तक प्रदेशभर में विशेष कैंप लगाकर स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि किसानों की सिंचाई, व्यापारिक गतिविधियों, उद्योगों और आमजन के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


