– जनता के भरोसे को बताया सबसे बड़ी ताकत
– बीते दो दशकों मे बदले की भावना से कम न करने वाले पहले नेता अग्रवाल
– सबसे ज्यादा जनता को देते हैं समय गुलजार रहते उनके दरबार
– यूथ इंडिया से सीधी बात
फर्रुखाबाद। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधान परिषद के पूर्व सदस्य और नगर पालिका परिषद फर्रुखाबाद में अपनी पत्नी श्रीमती बत्सला अग्रवाल के साथ लगातार चौथा कार्यकाल पूरा कर रहे मनोज अग्रवाल ने एक बार फिर अपनी सियासी सोच और कार्यशैली को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है,और यही वजह है कि उन्हें वर्षों से जनता का अटूट विश्वास मिलता रहा है।
मनोज अग्रवाल ने एक भावनात्मक और दार्शनिक उदाहरण देते हुए कहा “ईश्वर ने हर व्यक्ति को एक पेंसिल और एक रबर दी है। पेंसिल से वह अपने कर्म लिखता है और रबर से अपनी गलतियों को सुधारता है, न कि दूसरों की गलतियां मिटाने में समय बर्बाद करता है।” उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है जहां उन्होंने खुद को आत्ममंथन करने वाला और जिम्मेदार नेता बताया।
सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर खुलकर अपनी मंशा जाहिर कर दी। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी और जनता ने मौका दिया तो वह निश्चित रूप से चुनाव मैदान में उतरेंगे। यह बयान फर्रुखाबाद की राजनीति में नए समीकरण खड़े कर सकता है, क्योंकि लंबे समय से स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ और प्रभाव को मजबूत माना जाता रहा है।
उन्होंने जनता से मिले समर्थन को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि “जनता जनार्दन ने जो विश्वास दिया है, वही मेरी असली ताकत है। मैं अंतिम सांस तक जनता की सेवा करता रहूंगा।” उनके इस बयान से साफ है कि वह खुद को एक जनसेवक के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
मनोज अग्रवाल ने जिले की जमीनी समस्याओं को भी खुलकर उठाया। उन्होंने कहा कि फर्रुखाबाद जैसे आलू उत्पादन के बड़े केंद्र में किसानों को अब भी उचित मूल्य और संसाधनों की कमी से जूझना पड़ता है। साथ ही जिले की सड़कें, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाएं आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए वह लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनोज अग्रवाल का यह बयान सिर्फ एक भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि 2027 की सियासी जमीन तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। साफ-सुथरी छवि, लगातार चार कार्यकाल का अनुभव और स्थानीय मुद्दों पर पकड़, और बदले की भावना से काम न करना,ये सभी फैक्टर उन्हें आने वाले चुनाव में मजबूत दावेदार बना सकते हैं।
फिलहाल, फर्रुखाबाद की राजनीति में इस बयान के बाद हलचल तेज हो गई है। “यूथ इंडिया” इस बदलते सियासी समीकरण पर नजर बनाए हुए है क्योंकि यहां सिर्फ बयान नहीं, बल्कि आने वाले चुनाव का पूरा खाका तैयार होता दिख रहा है।
“सत्ता नहीं सेवा मेरा धर्म” मौका मिलेगा तो 2027 विधानसभा चुनाव लड़ा ही जायेगा :मनोज अग्रवाल


