अमेठी जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर चल रही गेहूं खरीद प्रक्रिया इस समय गंभीर बाधाओं का सामना कर रही है। बोरे की कमी के कारण कई क्रय केंद्रों पर तौल कार्य प्रभावित हो गया है, जिससे किसान अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार करने के बाद बिना बिक्री किए वापस लौटने को मजबूर हैं।
जिले में इस वर्ष 30,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए 106 क्रय केंद्र स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 100 केंद्र स्थापित भी हो चुके हैं। इसके बावजूद अब तक केवल 98 किसानों से 792.55 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद ही हो पाई है, जो तय लक्ष्य की तुलना में बेहद कम है।
विभिन्न एजेंसियों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। खाद्य विभाग को 17,900 मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन अब तक केवल 762.90 मीट्रिक टन की ही खरीद हो सकी है। पीसीएफ और मंडी समिति जैसे महत्वपूर्ण एजेंसियों ने अभी तक कोई खरीद दर्ज नहीं की है, जबकि पीसीयू और यूपीएसएस की खरीद भी बेहद सीमित रही है।
सबसे बड़ी समस्या बोरे की अनुपलब्धता बताई जा रही है, जिसके कारण कई केंद्रों पर तौल प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। इससे किसानों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उन्हें समय व श्रम दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रशासन ने स्थिति सुधारने के लिए मोबाइल टीमों का गठन किया है, लेकिन इसका प्रभाव अभी सीमित ही दिखाई दे रहा है।
डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा मिश्रा ने स्वीकार किया कि शुरुआती चरण में बोरे की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं और जल्द ही सभी क्रय केंद्रों पर पर्याप्त बोरे उपलब्ध कराकर खरीद प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।


