गौतम बुद्ध नगर
नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के बाद प्रशासन और श्रम विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए ठेकेदारों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। श्रमिकों के शोषण, वेतन में देरी और श्रम कानूनों के उल्लंघन की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने अब तक 10 ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं, जबकि 42 अन्य ठेकेदारों को नोटिस जारी कर ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
श्रम विभाग की जांच में सामने आया है कि कई ठेकेदार न्यूनतम वेतन अधिनियम का पालन नहीं कर रहे थे और श्रमिकों को तय मानकों से कम भुगतान किया जा रहा था। इसके अलावा ओवरटाइम का भुगतान नहीं करना, पीएफ और ईएसआईसी जैसी अनिवार्य सुविधाओं में अनियमितता और समय पर वेतन न देना भी प्रमुख शिकायतों में शामिल रहा। विभाग के अनुसार, अब तक कुल 245 ठेकेदारों को लाइसेंस निरस्तीकरण और ब्लैकलिस्टिंग के नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
अधिकारियों का कहना है कि श्रमिकों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन ठेकेदारों पर आरोप सिद्ध होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में उन्हें किसी भी सरकारी या निजी परियोजना में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
श्रम विभाग ने अन्य कंपनियों और फैक्ट्रियों में कार्यरत ठेकेदारों की भी जांच शुरू कर दी है, ताकि ऐसे मामलों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
इस कार्रवाई को नोएडा में श्रमिकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं, प्रशासन ने श्रमिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के शोषण या अनियमितता की शिकायत सीधे विभाग से करें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।


