नई दिल्ली
मध्य-पूर्व के अत्यंत संवेदनशील समुद्री क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंचता नजर आ रहा है। हाल ही में ईरान की ओर से दी गई कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिकी नौसेना का एक युद्धपोत क्षेत्र से वापस लौट गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत इस इलाके में समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने और कथित रूप से बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के उद्देश्य से पहुंचे थे। लेकिन ईरान की सेना, विशेषकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ कदम बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
ईरानी बलों ने ड्रोन की मदद से अमेरिकी जहाजों की निगरानी की और उन्हें क्षेत्र छोड़ने की ‘अंतिम चेतावनी’ दी। इसके बाद हालात को भांपते हुए अमेरिकी जहाज को पीछे हटना पड़ा। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव की झलक साफ दिखाई दे रही है।
हालांकि अमेरिका ने दावा किया था कि उसके दो गाइडेड मिसाइल विध्वंसक—USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर और USS माइकल मर्फी—सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुके हैं और उनका मिशन जारी है। लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी विदेशी सैन्य गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव किसी बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है।


