नई दिल्ली
देश की राजनीति में एक बार फिर परिसीमन को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गाँधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मौजूदा समय में असली मुद्दा महिलाओं का आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन की प्रक्रिया है, जिसे सरकार जल्दबाजी और मनमाने तरीके से आगे बढ़ा रही है।
एक लेख के माध्यम से उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन की आड़ में महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इस प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि इतने बड़े फैसले बिना व्यापक चर्चा और सर्वदलीय सहमति के नहीं लिए जाने चाहिए।
सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने सुझाव दिया कि 16 से 18 अप्रैल के बीच प्रस्तावित विशेष सत्र में जल्दबाजी में संशोधन लाने के बजाय, इन्हें मानसून सत्र तक टाल दिया जाए ताकि संसद में विस्तृत और सार्थक चर्चा हो सके।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि परिसीमन की प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है, जिससे देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा हो सकता है। ऐसे में उन्होंने सरकार से पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करने की अपील की है।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
महिलाओं का आरक्षण नहीं, असली मुद्दा तो परिसीमन है : सोनिया गांधी


