एटा। जिले में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक चले इस अभियान के बाद जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों में कुल 1 लाख 47 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं। इस बड़े बदलाव के बाद अब जिले के सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं और राजनीतिक दलों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशियों की रणनीतियां भी प्रभावित होती दिख रही हैं।
पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने के समय जिले में कुल 13,11,967 मतदाता दर्ज थे, लेकिन अंतिम प्रकाशन के बाद यह संख्या घटकर 11,64,967 रह गई है। वर्तमान मतदाता सूची के अनुसार जिले में 6,40,765 पुरुष, 5,24,180 महिला और 22 अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने से चुनावी गणित में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सबसे अधिक प्रभाव सदर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां अकेले 56,748 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इस कारण इस सीट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों की चिंता बढ़ गई है। वहीं अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी औसतन 30-30 हजार मतदाता कम हुए हैं, जिससे हर सीट पर नए सिरे से समीकरण बैठाने की कवायद शुरू हो गई है।
राजनीतिक दल अब यह आकलन करने में जुट गए हैं कि किन क्षेत्रों से अधिक संख्या में मतदाता हटे हैं और इससे उनके पारंपरिक वोट बैंक पर क्या असर पड़ेगा। जातीय और क्षेत्रीय आधार पर भी नए सिरे से गणित लगाया जा रहा है, ताकि आगामी चुनावों के लिए रणनीति तय की जा सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मतदाता सूची में इतनी बड़ी कटौती का सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। ऐसे में सभी दलों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे नए मतदाता आंकड़ों के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करें और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करें।
फिलहाल इस बदलाव के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा दल और प्रत्याशी इस बदले हुए चुनावी गणित के अनुसार खुद को ढाल पाता है।


