मतदाता सूची में ‘नो मैपिंग’ और तार्किक विसंगतियों पर बड़ी कार्रवाई, 10 दिन में देना होगा जवाब
लखनऊ। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को विभिन्न श्रेणियों में नोटिस दिए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई मतदाता सूची को त्रुटिरहित, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि आगामी चुनावों से पहले किसी प्रकार की गड़बड़ी न रह जाए।
प्राथमिक जांच में 1.09 करोड़ मतदाताओं के विवरण में विसंगतियां सामने आई हैं। इन मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति को 10 दिनों के भीतर अपने दावे/आपत्ति के साथ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, समय सीमा के भीतर जवाब न देने की स्थिति में संबंधित नामों पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें मतदाता सूची से नाम हटाना भी शामिल हो सकता है।
‘नो मैपिंग’ के 1.04 करोड़ मामले
जांच के दौरान 1.04 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए हैं जिनका ‘नो मैपिंग’ स्टेटस दर्ज है। इसका अर्थ है कि संबंधित मतदाता का रिकॉर्ड भू-स्थान (जियोग्राफिकल मैपिंग ) से मेल नहीं खा रहा है या बूथ स्तर पर उसका सत्यापन स्पष्ट नहीं है।
ऐसे मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को विशेष रूप से घर-घर सत्यापन का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा 2.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इनमें
एक ही पते पर असामान्य संख्या में पंजीकरण
आयु या जन्मतिथि में त्रुटियां
दोहरे या संदिग्ध पंजीकरण
स्थान परिवर्तन के बावजूद नाम का अपडेट न होना
जैसी समस्याएं शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि
संबंधित मतदाताओं को नोटिस की जानकारी समय से दी जाए
सार्वजनिक स्थानों, पंचायत भवन, नगर निकाय कार्यालय और बूथ स्तर पर मतदाता सूची चस्पा की जाए,
पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए,
BLO स्तर पर विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाए,
जिलाधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मतदाताओं के लिए क्या है जरूरी?
यदि किसी मतदाता को नोटिस प्राप्त होता है तो निर्धारित 10 दिन की अवधि के भीतर जवाब देना अनिवार्य होगा।
आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र आदि आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
संबंधित निर्वाचन कार्यालय या बूथ लेवल अधिकारी से संपर्क करना होगा।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी विशेष वर्ग को लक्षित कर नहीं, बल्कि डेटा शुद्धिकरण की प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
चुनावी तैयारियों से जुड़ा अभियान
राजनीतिक हलकों में इस व्यापक नोटिस प्रक्रिया को आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रदेश में 3.26 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचने वाली यह प्रक्रिया प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी कवायद मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कितने मतदाता अपने रिकॉर्ड का सत्यापन कराते हैं और कितने नामों पर अंतिम कार्रवाई होती है।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के व्यापक सत्यापन की यह पहल चुनावी पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अब नजर इस बात पर है कि निर्धारित समय सीमा में मतदाता किस प्रकार अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हैं और प्रशासन किस तरह निष्पक्ष तरीके से प्रक्रिया पूरी करता है।






