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Friday, April 3, 2026

यूपी में 20 लाख जनधन खाते खाली, बैंकों पर 700 करोड़ का बोझ; मनी म्यूल का बढ़ा खतरा

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लखनऊ| प्रदेश में वित्तीय समावेशन की सबसे बड़ी योजना प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए लाखों बैंक खातों को लेकर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। राज्य के आठ जिलों में करीब 20 लाख जनधन खाते ऐसे हैं जिनमें एक भी रुपया जमा नहीं है। इन खातों के लगातार निष्क्रिय रहने से जहां बैंकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, वहीं इन्हें साइबर अपराध के लिहाज से भी संदिग्ध श्रेणी में रखा जा रहा है।
बैंकों की ओर से राज्य सरकार को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 10.22 करोड़ जनधन खाते संचालित हैं, जो देश के कुल 57.58 करोड़ खातों का लगभग 18 प्रतिशत है। यह आंकड़ा प्रदेश को देश में शीर्ष स्थान पर रखता है। इन खातों में महिलाओं की भागीदारी अधिक है, लगभग 53 प्रतिशत खाताधारक महिलाएं हैं। हालांकि, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के आठ जिलों—आगरा, आजमगढ़, बिजनौर, गाजीपुर, जौनपुर, कुशीनगर, मेरठ और सहारनपुर—में बड़ी संख्या में खाते पूरी तरह खाली पड़े हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आठ जिलों में 1.60 करोड़ से अधिक जनधन खाते हैं, जिनमें से करीब 20 लाख खातों का बैलेंस शून्य है। शेष खातों में लगभग 7800 करोड़ रुपये जमा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन खातों के निष्क्रिय रहने से योजना के मूल उद्देश्य—गरीबों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना—पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता बैंकों के लिए इन खातों का मेंटेनेंस खर्च है। एक खाते को सक्रिय बनाए रखने के लिए बैंकों को सालाना करीब 3500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिसमें तकनीकी ढांचा, कर्मचारियों का वेतन और शाखा संचालन शामिल है। इस हिसाब से केवल इन निष्क्रिय खातों को बनाए रखने में ही बैंकों पर हर साल लगभग 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
इसके साथ ही बैंकों ने इन शून्य बैलेंस खातों को “मनी म्यूल अकाउंट” के रूप में संदिग्ध श्रेणी में रखना शुरू कर दिया है। ऐसे खाते साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बन जाते हैं, जिनका उपयोग अवैध धन के लेन-देन या ठगी की रकम को घुमाने के लिए किया जा सकता है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद अचानक बड़ी रकम का आना और तुरंत निकासी होना बैंकों के लिए खतरे का संकेत होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन खातों को समय रहते सक्रिय नहीं किया गया और केवाईसी जैसी प्रक्रियाएं अपडेट नहीं की गईं, तो यह समस्या आगे चलकर बैंकिंग व्यवस्था और साइबर सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

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