पीलीभीत। दशकों से इंतजार कर रहे बांग्लादेशी विस्थापित परिवारों को आखिरकार उनका हक मिल गया। शारदा नदी की तलहटी में बसे 1466 परिवारों को 55 साल बाद जमीन का मालिकाना अधिकार प्रदान किया गया है, जिससे इन परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा की नई उम्मीद जगी है।
बताया जा रहा है कि ये परिवार वर्षों पहले विस्थापित होकर यहां आकर बसे थे और लंबे समय से जमीन पर रह रहे थे, लेकिन उनके पास कानूनी स्वामित्व नहीं था। इस कारण उन्हें सरकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब प्रशासन द्वारा जमीन का मालिकाना हक दिए जाने के बाद इन परिवारों को न सिर्फ कानूनी पहचान मिली है, बल्कि उनके जीवन में स्थिरता भी आएगी।
स्थानीय प्रशासन के इस फैसले को मानवीय दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जमीन के मालिकाना हक मिलने से इन परिवारों को आवास, बिजली, पानी, राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। साथ ही, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह एक स्थायी आधार तैयार करेगा।
ग्रामीणों में इस निर्णय को लेकर खुशी का माहौल है। वर्षों से अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे लोगों ने इसे न्याय मिलने जैसा बताया है। कई परिवारों ने कहा कि अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर चिंता कम हो गई है और वे अपने बच्चों की पढ़ाई व बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
यह कदम न केवल प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि लंबे समय से लंबित मामलों को भी यदि इच्छाशक्ति हो तो सुलझाया जा सकता है।
55 साल बाद मिला हक: 1466 बांग्लादेशी विस्थापित परिवारों को जमीन का मालिकाना अधिकार


