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Saturday, August 30, 2025

सरकारी स्कूल बना बच्चों की कब्रगाह! झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से 5 मासूमों की मौत, दर्जनों घायल

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जर्जर इमारत, खामोश प्रशासन — लापरवाही ने ली मासूम ज़िंदगियाँ

झालावाड़| राजस्थान के झालावाड़ ज़िले के पीपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह स्कूल परिसर में जो हुआ, वह किसी भयावह सपने से कम नहीं था। एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की छत अचानक ढह गई, और उसकी मलबे में 5 मासूम बच्चों की जान चली गई, जबकि 30 से अधिक बच्चे घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब बच्चे रोज़ की तरह प्रार्थना सभा में खड़े थे — लेकिन उन्हें क्या पता था कि आज स्कूल की इमारत ही उनकी मौत का फंदा बन जाएगी।

पुरानी इमारत, अनसुनी चेतावनियाँ

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्कूल वर्षों से जर्जर स्थिति में था। दीवारें फटी हुई थीं, छत झुकी हुई थी और कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन को इसकी मरम्मत के लिए चेताया भी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
नतीजा: एक दर्दनाक त्रासदी, जिसने बच्चों के सपनों को हमेशा के लिए मलबे में दफन कर दिया।

रेस्क्यू अभियान जारी, परिजन बेहाल

हादसे के तुरंत बाद ग्रामीण, शिक्षक और परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। बच्चों को मलबे से निकालने के लिए हाथों से पत्थर हटाए गए। कुछ देर बाद प्रशासनिक टीम, पुलिस और JCB मशीनें भी मौके पर पहुंचीं।

अब तक:

✅ 8 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया

✅ 35 से ज्यादा घायल, जिनमें 11 की हालत गंभीर

✅ कई बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया गया

अस्पतालों में कराहती चीखें, बाहर रोते परिजन

मनोहरथाना अस्पताल और झालावाड़ जिला अस्पताल में ज़ख्मी बच्चों का इलाज जारी है।
डॉक्टर कौशल लोढ़ा के मुताबिक:

“गंभीर रूप से घायल बच्चों को रेफर किया गया है। स्थिति चिंताजनक है।”
अस्पताल के बाहर माँ-बाप अपने बच्चों के लिए दहाड़ें मार रहे हैं, उनके हाथों में स्कूल बैग, आंखों में डर और दिल में उम्मीद है — कि कहीं से कोई चमत्कार हो जाए।

नेताओं की संवेदनाएँ, लेकिन ज़िम्मेदार कौन?

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य नेताओं ने दुख जताया है, लेकिन सवाल यह है:

>> क्या संवेदनाओं से बच्चों की

>> क्या इस इमारत की स्थिति की समय रहते जांच नहीं की जा सकती थी? जान लौटेगी?

क्या यह हादसा नहीं, हत्या है?

जब प्रशासन को इमारत की जर्जरता की जानकारी थी, तो फिर बच्चों को वहां भेजना किसकी ज़िम्मेदारी थी?
क्या यह सिर्फ ‘हादसा’ कहलाएगा, या एक ‘प्रशासनिक हत्या’ मानी जाएगी?

अब सवाल उठने चाहिए:

🔺 कितने और बच्चों की जानें जाएंगी, तब सरकार जगेगी?

🔺 क्या शिक्षा का अधिकार सिर्फ किताबों में रहेगा और ज़मीनी हकीकत कब्रगाह बनती रहेगी?

🔺 क्या हर जर्जर स्कूल पर अब भी कोई कार्यवाही नहीं होगी?

माँग है — सिर्फ मुआवजा नहीं, जवाबदेही और सज़ा चाहिए!

🟨 हर जिले में जर्जर स्कूलों की तत्काल समीक्षा की जाए
🟥 जिम्मेदार अधिकारी व इंजीनियर पर एफआईआर दर्ज हो
🟩 पीड़ित परिवारों को मदद के साथ न्याय भी मिले

आज इन बच्चों ने जान गंवाई है, कल किसी और के बच्चे हो सकते हैं।
सरकार, अब जागिए।

कब्रगाह बने स्कूलों को शिक्षा के मंदिर बनाइए — वरना इतिहास माफ नहीं करेगा।

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