बीजापुर में हाल ही में मारे गए थे छह खूंखार उग्रवादी
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के भेज्जी–चिंतागुफा के घने जंगलों में शनिवार सुबह डीआरजी जवानों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। सर्चिंग अभियान पर निकली टीम पर नक्सलियों ने घात लगाकर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवानों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू की। शुरुआती जानकारी के मुताबिक तीन नक्सलियों के मारे जाने की खबर सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल बाकी है। मौके पर रुक-रुक कर फायरिंग जारी है और सुरक्षा बल नक्सलियों के भागने के सभी रास्ते बंद करने के लिए इलाके को चारों ओर से घेरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। सुकमा एसपी किरण चव्हाण लगातार ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और बताया है कि सभी जवान सुरक्षित हैं तथा अतिरिक्त बल घटनास्थल की ओर रवाना कर दिया गया है। इसी बीच, बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी कार्रवाई में सुरक्षा बलों को इससे पहले 13 नवंबर को बीजापुर जिले में बड़ी सफलता मिली थी, जब कांदुलनार, कचलारम और गुज्जाकोंटा के जंगलों में दो दिनों तक चली मुठभेड़ में 27 लाख रुपये के इनामी छह खूंखार नक्सली ढेर कर दिए गए थे। डीआरजी बीजापुर, डीआरजी दंतेवाड़ा और एसटीएफ की संयुक्त टीमों ने इस अभियान को अंजाम दिया था। मारे गए नक्सलियों में मद्देड़ एरिया कमेटी के प्रभारी और 42 मामलों में वांछित डीवीसीएम कन्ना उर्फ बुचन्ना (इनाम 8 लाख), भाकपा माओवादी नेता पापाराव की पत्नी और पामेड़ एरिया कमेटी की सचिव डीवीसीएम उर्मिला (इनाम 8 लाख), एसीएम जगत तामो उर्फ मोटू (इनाम 5 लाख), पीएम देवे (इनाम 2 लाख), पीएम भगत (इनाम 2 लाख) और पीएम मंगली ओयाम (इनाम 2 लाख) शामिल थे। इनका मारा जाना नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि पश्चिम बस्तर डिवीजन के 50–60 माओवादियों के बड़े समूह की मौजूदगी की जानकारी के बाद यह अभियान छेड़ा गया था। लगातार मिल रही सफलताओं से सुरक्षा बलों का मनोबल और मजबूत हुआ है तथा बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों पर बड़ा दबाव बना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि माओवादी नेटवर्क के पूरी तरह खत्म होने तक ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।






