गाजा पट्टी में शनिवार (स्थानीय समय) को हुए इस्राइली हमलों में कम से कम 29 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। यह आंकड़ा पिछले साल अक्तूबर में लागू हुए संघर्षविराम के बाद एक दिन में हुई मौतों का अब तक का सबसे बड़ा मामला बताया जा रहा है। संघर्षविराम का मकसद दो साल से जारी खून-खराबे को रोकना और हालात को सामान्य करना था, लेकिन ताजा घटनाओं ने एक बार फिर हालात की नाजुकता को उजागर कर दिया है।
ये हमले ऐसे वक्त पर हुए हैं, जब एक दिन पहले ही इस्राइल ने हमास पर संघर्षविराम उल्लंघन का नया आरोप लगाया था। इस्राइली सेना का कहना है कि हमास की गतिविधियों ने सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया, जिसके चलते जवाबी कार्रवाई जरूरी हो गई। वहीं, फलस्तीनी पक्ष का दावा है कि हमलों में आम नागरिकों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, गाजा के अलग-अलग इलाकों में हवाई और जमीनी हमले किए गए। इन हमलों में एक शरणार्थी शिविर, एक आवासीय इमारत और एक पुलिस थाना भी शामिल है। कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को पहले से ही दबाव में चल रहे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात के समय हुए हमलों से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश करनी पड़ी। बिजली और संचार सेवाएं भी कई इलाकों में बाधित हो गईं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में मुश्किलें आईं।
इन हमलों से पहले इस्राइल ने घोषणा की थी कि वह इस साप्ताहांत में मिस्र की सीमा पर स्थित रफाह क्रॉसिंग को खोलेगा। यह क्रॉसिंग पिछले साल हुए उस समझौते का अहम हिस्सा थी, जिसे युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। रफाह क्रॉसिंग के खुलने से मानवीय सहायता और लोगों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद थी, लेकिन ताजा हिंसा ने इन उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि यह युद्ध 7 अक्तूबर 2023 को शुरू हुआ था, जब हमास के लड़ाकों ने दक्षिण इस्राइल पर बड़ा हमला किया था। उस समय इलाके में नोवा संगीत उत्सव चल रहा था। इस हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया था।
इसके जवाब में इस्राइल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। बीते दो वर्षों में हुए इन हमलों में 60 हजार से अधिक फलस्तीनी मारे जाने का दावा किया गया है। लगातार बमबारी और नाकेबंदी के चलते गाजा में हालात बेहद खराब हो गए थे और बड़ी आबादी को भुखमरी व अकाल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा।
बाद में अमेरिका, कतर और मिस्र जैसे मध्यस्थ देशों की कोशिशों से संघर्षविराम की एक योजना सामने आई। इस योजना के तहत गाजा में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई और बदले में इस्राइल की जेलों में बंद फलस्तीनी कैदियों को छोड़ने पर सहमति बनी थी। यह समझौता कई चरणों में लागू होना था और इसे स्थायी शांति की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा था।
हालांकि, ताजा हमलों के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या संघर्षविराम लंबे समय तक टिक पाएगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक बार फिर दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है, ताकि क्षेत्र में बढ़ते मानवीय संकट को रोका जा सके।


