जर्मनी: यूरोप में अब ईरान की खामेनेई शासन के ख़िलाफ़ आवाज उठने लगी है। जर्मनी (Germany) के म्यूनिख शहर में शनिवार को ईरान की सरकार (Iran government) के खिलाफ एक बहुत बड़ी रैली आयोजित की गई। पुलिस के अनुसार लगभग 2.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब म्यूनिख में वैश्विक नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी। रैली को ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के आह्वान पर ‘ग्लोबल डे ऑफ एक्शन’ के अंतर्गत आयोजित किया गया था।
ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के आह्वान पर जर्मनी के म्यूनिख शहर में खामेनेई शासन के खिलाफ दो लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे, लोगों ने खामेनेई शासन के द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक दमन का विरोध किया। रैली में प्रमुख वक्ता रेजा पहलवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चेतावनी दी कि अगर अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक देश चुप्पी साधे रहेंगे, तो ईरान में और भी लोगों की जान जा सकती है। उन्होंने दुनिया से अपील की कि वे ईरानी जनता के संघर्ष में उनका समर्थन करें।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक संगठन ने दावा किया है कि पिछले माह के विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत हुई है। हालांकि इस दावा की पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, ईरान सरकार ने इससे अलग संख्या जारी की है। ईरान के ख़िलाफ यह गुस्से का प्रदर्शन केवल म्यूनिख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कनाडा के टोरंटो और साइप्रस के निकोसिया में भी सहमति में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
प्रदर्शनकारियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार ‘सत्ता बदलने’ के नारे लगाए। उन्होंने हरे, सफेद और लाल रंग के पुराने ईरानी झंडे लहराए, जिन पर शेर और सूरज का प्रतीक बना था। यह वही झंडा है जो 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान में आधिकारिक रूप से प्रयोग किया जाता था।


