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Thursday, April 9, 2026

लेबनान पर इजराइली हमले से बड़ा तनाव, सैकड़ों मिसाइलों में 250 से अधिक मौतें, मध्य पूर्व में हालात गंभीर

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तेल अवीव
इजराइल और लेबनान के बीच तनाव ने बुधवार को खतरनाक मोड़ ले लिया, जब इजराइली सेना ने लेबनान के कई हिस्सों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 254 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1,165 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस विनाशकारी हमले के बाद देश में राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया है और हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

हमले राजधानी बेरूत, बेक्का वैली, माउंट लेबनान, सैदोन और दक्षिणी क्षेत्रों के कई गांवों में किए गए। बताया जा रहा है कि सैकड़ों मिसाइलों के जरिए यह कार्रवाई की गई, जिससे कई इलाकों में भारी तबाही मची। बड़ी संख्या में इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और नागरिकों में भय का माहौल फैल गया। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, लेकिन नुकसान का आंकड़ा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

इजराइली सेना का कहना है कि यह हमला उसके नए सैन्य अभियान का हिस्सा है, जो 2 मार्च से जारी है। सेना के मुताबिक, इस दौरान हिजबुल्लाह के 100 से अधिक कमांड सेंटर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों का दावा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन है, जिसका उद्देश्य संगठन की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।

इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विवाद खड़ा कर दिया है, खासकर उस समय जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा की गई थी। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि कुछ मध्यस्थों का दावा है कि इसमें लेबनान को भी शामिल माना जाना चाहिए।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा कि लेबनान इस सीजफायर समझौते से अलग है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर दबाव डालते हुए कहा कि उसे तय करना होगा कि वह शांति लागू कराना चाहता है या संघर्ष को जारी रखना चाहता है। इस बयानबाजी से क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

इसी बीच एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर प्रति बैरल एक डॉलर का शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। इसके तहत जहाजों को अपने कार्गो की पूरी जानकारी पहले देनी होगी और भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में करने का प्रस्ताव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।

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