फर्रुखाबाद। पवित्र माहे रमजान के 21वें रोजे के अवसर पर शहर में शिया समुदाय की ओर से मातम जुलूस निकालकर हजरत मौला अली को अकीदत पेश की गई। सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुआ यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए ठंडी सड़क स्थित मेहंदी बाग छोटी कर्बला पर जाकर समाप्त हुआ। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लेकर हजरत अली की शहादत को याद किया और मातम कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मातमी जुलूस की शुरुआत कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सैय्यद आफताब हुसैन के आवास से हुई। जुलूस में शामिल अकीदतमंद काले वस्त्र धारण किए हुए थे, जिनमें महिला-पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। जुलूस के दौरान श्रद्धालु ‘या अली मौला’ और ‘हैदर मौला’ के नारे लगाते हुए हजरत मौला अली के ताबूत की जियारत कर रहे थे। ताबूत को छूने और चूमने के लिए अकीदतमंदों में खासा उत्साह दिखाई दिया और पूरे माहौल में गम और अकीदत का माहौल बना रहा।
इस मौके पर श्रद्धालुओं ने बताया कि माहे रमजान का 21वां रोजा हजरत अली की याद में मनाया जाता है। इतिहास के अनुसार 19वें रमजान को फज्र की नमाज के दौरान एक दुश्मन ने हजरत मौला अली पर जहर बुझा खंजर से हमला कर दिया था, जिसके बाद 21वें रमजान को उनका विसाल हो गया था। हजरत मौला अली इस्लाम के चौथे खलीफा माने जाते हैं और मुस्लिम समुदाय में उनका विशेष सम्मान और महत्व है।
जुलूस के समापन स्थल छोटी कर्बला पर पहुंचकर अकीदतमंदों ने ताबूत की जियारत की और उनके नाम पर रोजा इफ्तार, शरबत और लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सैय्यद आफताब हुसैन, कांग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष नफीस हुसैन, सैफ हुसैन, मुनव्वर हुसैन, बिकर हुसैन, इंतजार हुसैन सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से भी आवश्यक व्यवस्था की गई थी।
21वें रमजान पर शिया समुदाय का मातमी जुलूस, अकीदतमंदों ने हजरत मौला अली को दी अकीदत


