सिर्फ काम करने वाले ही दौड़ में रहेंगे, पार्टी ने शुरू की जमीनी रिपोर्ट कार्ड की पड़ताल
शरद कटियार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब केवल 19 महीने शेष हैं। 2022 में हुए विधानसभा चुनाव (assembly elections) के बाद अगला चुनाव मार्च 2027 में संभावित है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने विधायकों पर कड़ी निगरानी और रिपोर्ट कार्ड की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी हाईकमान साफ संकेत दे रहा है कि अब टिकट सिर्फ उन्हीं नेताओं को मिलेगा जिन्होंने अपने क्षेत्र में जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई है और सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 403 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने पिछली बार 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं सहयोगी दलों—निर्दल, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी—के साथ मिलकर यह आंकड़ा 273 सीटों तक पहुंचा था। विपक्ष में सपा 111, कांग्रेस 2, बसपा 1 और बाकी निर्दलीय जीते थे। इस बार संगठन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि टिकट वितरण में सिर्फ जीतने की क्षमता और परफॉर्मेंस कार्ड को ही आधार माना जाएगा।
बीजेपी ने अपने सांसदों और विधायकों के कामकाज का माइक्रो मैनेजमेंट शुरू कर दिया है। जिलों में संगठन मंत्री लगातार रिपोर्ट भेज रहे हैं कि कौन विधायक जनता के बीच सक्रिय है, कौन सिर्फ कुर्सी का आनंद ले रहा है। साथ ही, बूथ प्रबंधन से लेकर पंचायत स्तर तक संगठनात्मक बैठकों में भागीदारी की भी निगरानी हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पार्टी ने अब यह संदेश दे दिया है कि “निष्क्रिय विधायकों को टिकट नहीं मिलेगा”। वहीं, जिन विधायकों पर जनता की नाराजगी सामने आएगी, उनका टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। ऐसे में पार्टी के 255 मौजूदा विधायकों में से कम से कम 30 से 40% तक के टिकट बदलने की संभावना जताई जा रही है।
विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही विधायकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। अगले 19 महीनों में जो विधायक जनता के बीच अपनी सक्रियता और संगठनात्मक जिम्मेदारी दिखा पाएंगे, वही दोबारा पार्टी की टिकट सूची में शामिल होंगे।