बहराइच। परिषदीय विद्यालयों की सरकारी किताबें कबाड़ी को बेचे जाने के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में यह तथ्य लगभग स्पष्ट हो चुका है कि बेसिक शिक्षा विभाग के जिला मुख्यालय स्थित भंडार गृह से करीब 15,593 किताबें नदारद हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कबाड़ी की दुकान से बरामद हुई किताबें क्या इसी सरकारी गोदाम की थीं या फिर किसी अन्य स्थान से लाई गई थीं। इसी बिंदु पर जांच अभी उलझी हुई है और अधिकारी साक्ष्य जुटाने में लगे हैं।
जानकारी के अनुसार 16 फरवरी को मुरादाबाद से एक ट्रक लखीमपुर होते हुए बहराइच लाया गया था। बताया गया कि ट्रक में परिषदीय विद्यालयों के लिए आई लाखों रुपये मूल्य की किताबें लदी थीं। मामला सामने आते ही जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने तत्काल जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की पड़ताल के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पुस्तकों की रिसीविंग प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं और भंडारण स्थल पर सुरक्षा के समुचित इंतजाम भी नहीं थे।
जांच रिपोर्ट में लापरवाही उजागर होने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। अनुचर आलोक कुमार और शफीक अहमद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं अनुदेशक अतुल कुमार सिंह, सामुदायिक सहभागिता समन्वयक आशुतोष सिंह और स्पेशल एजुकेटर दीपक कुमार की संविदा समाप्त कर दी गई है।
इसके अतिरिक्त प्रभारी सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी वीरेश कुमार वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी नगर डाली मिश्रा तथा खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय रंजीत कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
फिलहाल शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और यह प्रकरण सरकारी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता व जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे घोटाले की परतें पूरी तरह खुल सकेंगी।
भंडार गृह से 15,593 पुस्तकें गायब, कबाड़ी कनेक्शन की जांच तेज


