– जंग के बीच मिसाइल ताकत का प्रदर्शन
तेहरान
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर आक्रामक रुख दिखाया है। देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दावा किया है कि उनके साथ करीब 1 करोड़ 40 लाख लोग देश की रक्षा के लिए अपनी जान देने को तैयार हैं।
राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इज़राइल के साथ तनाव चरम पर है। क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं और हर दिन नई रणनीतियां सामने आ रही हैं।
पेजेश्कियान ने कहा कि यह लोग स्वेच्छा से देश के लिए बलिदान देने को तैयार हैं। उनका यह बयान ईरान में राष्ट्रीय एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इस बयान के साथ ही ईरान ने अपनी सैन्य ताकत को लेकर भी बड़े दावे किए हैं। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि देश की सभी ‘मिसाइल सिटीज’ पूरी तरह सक्रिय हैं।
इन गुप्त ठिकानों से लगातार मिसाइलों की तैनाती और परीक्षण किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, नई टीमों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के चलते दुश्मन के हमलों को नाकाम किया जा रहा है।
ईरानी सैन्य सूत्रों ने दावा किया कि देश के पास संसाधनों और सैनिकों की कोई कमी नहीं है। मिसाइल यूनिट्स को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि युद्ध की स्थिति में वे पूरी तरह तैयार रहें।
ईरान ने इज़राइल के उस दावे को भी खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उसके पास सीमित संख्या में ही मिसाइलें बची हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, उनका भंडार अनुमान से कहीं अधिक बड़ा है।
एक सैन्य अधिकारी ने यहां तक कहा कि केवल एक ‘मिसाइल सिटी’ में ही इज़राइल के दावे से तीन गुना ज्यादा मिसाइलें मौजूद हैं। यह बयान ईरान की सैन्य क्षमता का संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने पिछले वर्षों में अपने सैन्य ढांचे को काफी मजबूत किया है। खासकर मिसाइल उत्पादन और भंडारण को भूमिगत कर सुरक्षा बढ़ाई गई है।
बताया गया है कि लंबे समय से लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और वह अपने हथियार खुद तैयार कर रहा है।
सैन्य अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में कई नए अधिकारियों को मिसाइल यूनिट्स में तैनात किया गया है, जो विशेष प्रशिक्षण लेकर आए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इज़राइल के साथ टकराव और अमेरिका की चेतावनियों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह बयानबाजी और सैन्य तैयारी वास्तविक टकराव में बदलती है या कूटनीतिक समाधान की कोई राह निकलती है।


